चंडीगढ़ - राव बंसी सिंह का नाम जहन में आते ही सिर पर झक सफेद सुरूचिपूर्ण बालों और परिपक्व सफेद मूछों वाले सज्जन का नाम जहन में आता है जो जिला महेन्द्रगढ़ के बच्चे-बच्चे की जुबान पर विकास और विनम्रता के पुरोधा के रूप में आज भी विद्यमान है।
राव बंसी सिंह बहुत विनम्र थे परन्तु क्षेत्र के विकास की बात आते ही वे सरदार पटेल की तरह उत्तरदायित्वपूर्ण सख्त रवैया अपनाने में कभी नहीं झिझके। उन्होंने अपने मंत्रित्व के काल में विकास कार्यों की झड़ी लगाते हुए अटेली व नांगल चौधरी में सब तहसील बनवाई, संजय महाविद्यालय अटेली की स्थापना कर उसका सरकारीकरण करवाया।
वे अटेली के सच्चे योद्धा थे। उन्होंने अटेली गांव को अटेली मंडी में बदलते हुए उसे एक शहर का स्वरूप प्रदान किया। अल्प काल में ही उन्होंने अटेली का कायाकल्प करते हुए नई अनाज मंडी, बस स्टैण्ड, बाल भवन, सैनिक विश्राम गृह, स्टैट बैंक आफ पटियाला की शाखा एवं फोरलेन सड़क प्रदान की। इसके अतिरिक्त सुजापुर गांव में वोकेशनल आईटीआई गढ़ी महासर गांव में 33 केवी बिजली सब-स्टेशन, अनेक गांवों में आंगनबाड़ी केन्द्र, पीएचसी व सीएचसी, अनेक गांवों में नए स्कूल बनवाने तथा उनका दर्जा बढ़वाने जैसे अनेक विकास कार्य करवाए।
स्व. राव बंसी सिंह त्याग की भावना से ओतप्रोत थे। वर्ष 1977 में राव बिरेंद्र सिंह जब संसद में एमपी का चुनाव हार गए तब राव बंसी सिंह ने अटेली की सीट का त्याग किया व राव बिरेंद्र सिंह विधायक बने। वर्ष 1980 में फिर राव बिरेंद्र सिंह सांसद चुने गए। इसके बाद अटेली विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में रिकार्ड 28 हजार मतों से जीत हासिल कर स्व. राव बंसी सिंह ने अपनी लोकप्रियता साबित की तथा अटेली सहित पूरे जिला महेंद्रगढ़ के लोगों के हृदय सम्राट बन गए थे। राजनीति के साथ-साथ वे सभी सामाजिक सेवाओं के माध्यम से जनता से जुड़े रहे। उन्होंने 1987 में एक बार फिर त्याग का परिचय देते हुए अटेली से बाबा खेतानाथ के विरुद्ध चुनाव लड़ने का त्याग किया।
उन्हें याद करते हुए उनके सुपुत्र एवं हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री राव नरेन्द्र सिंह कहते हैं कि उन्होंने अत्यंत शांत रहते हुए भी विकास के क्षेत्र में संग्राम की तरह काम किया। 29 जुलाई 1931 को गांव मंढाणा में एक किसान परिवार में उनका जन्म हुआ। बहुआयामी प्रतिभा के धनी उनके पिता न केवल पढ़ाई में तेज थे अपितु खेलों में भी उनकी काफी रूचि थी। राव नरेन्द्र सिंह बताते हैं कि जन-कल्याण की भावना से प्रेरित होकर वे राजनीति में आए और अटेली को उन्होंने अपना कर्म क्षेत्र बनाया। 1972 से अटेली विधान सभा क्षेत्र से विधायक की पारी खेलते हुए 1980 तथा 1991 में तीन बार विधायक निर्वाचित हुए और भजन लाल सरकार में पांच वर्ष तक पंचायती विकास मंत्री रहे। इसी समय में उन्होंने पंचायती राज संस्थाओं की मजबूती का सराहनीय कार्य किया जिसे आज भी मिसाल के रूप में याद किया जाता है।
वे बाबा खेतानाथ के आदर्शों से प्रभावित थे। एक अध्यापक से अपने कैरियर की शुरूआत करने के बाद वे राजनीति से जुड़े और उन्होेंने राष्ट्रीय बीज निगम के निदेशक, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान हैदराबाद के सदस्य, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी सदस्य, हरियाणा सहकारी बैंक चंढीगढ़ के निदेशक, महेन्द्रगढ़ के जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर, जिला महेन्द्रगढ़ कांग्रेस कमेटी के प्रधान के अतिरिक्त अनेकों सामाजिक संगठनों से भी जुड़े रहे। उन्होंने गांव सिंहमा में मंदिर तथा वेदान्त आश्रम के निर्माण में उल्ल्ेखनीय योगदान दिया।
उनके अतीत को याद करते हुए राव नरेन्द्र सिंह कहते हैं कि उनका जीवन गौरवशाली था और उनकी शिक्षाएं आज भी उन्हें नारनौल के लोगों की सेवा करने को प्रेरित करती हैं।