चंडीगढ़, 17 अप्रैल- हरियाणा सरकार ने मैसर्ज आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी लि0 को भू-स्वामियों को वार्षिकी वितरित करने की समस्त प्रक्रिया में जानबूझ कर देरी करने तथा अपने दायित्वों को पूरा करने में असफल रहने के कारण हरियाणा सरकार या उसके किसी विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों या स्वायत्त निकायों के साथ आगे कोई भी कार्य करने से तीन वर्ष की अवधि के लिए बहिष्कृत कर दिया है।
वित्त विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि मैसर्ज आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी को ब्लैकलिस्टड किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नोटिसी, बहरहाल, सरकार से आग्रह करके इस आदेश की तिथि से एक मास के भीतर ब्लैकलिस्टिंग की समस्त अवधि या हिस्से की एवज में प्रस्तावित ब्लैकलिस्टिंग अवधि के दौरान प्रत्येक छः मास या उसके हिस्से के लिए एक प्रतिशत की दर से जुर्माना ब्याज की अदायगी करके चक्रवृद्घि फीस की अदायगी करने का विकल्प ले सकता है।
उन्होंने कहा कि नोटिसी को ब्याज की ऐसी बढ़ी हुई दर की अदायगी एडवांस प्राप्त करने की तिथि से लेकर विभाग को एसबीआई की बेस दर पर ब्याज एवं एडवांस की पुनःअदायगी की तिथि तक की अवधि के लिए अग्रिम राशि पर करनी होगी। ब्लैकलिस्टिंग अवधि की कम्पाऊडिंग की अनुमति के लिए अपेक्षित चक्रवृद्घि फीस की प्राप्ति के बाद आवश्यक आदेश पारित किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि चूंकि सरकार बिना किसी देरी के और इस प्रकिया को रद्द करने का कड़ा कदम उठाये बिना अपनी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति के तहत अपनी प्रतिबद्घता को पूरा करने की इच्छुक थी, इसलिए उसने सेवा स्तरीय समझौते (एसएलए) में एक वाया मीडिया शामिल किया कि हरियाणा सरकार सेवा प्रदाता द्वारा अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए अपनी भूमिका एवं जिम्मेदारियों का प्रदर्शन करते हुए उसके समक्ष आने वाली किसी भी परिचालन बाधा पर विचार करने के लिए प्रधान सचिव, वित्त, हरियाणा की अध्यक्षता में अलग से एक उप कमेटी गठित एवं अधिसूचित करेगी। वर्णित खण्ड 2.3.4 डाला गया ताकि सेवा प्रदाता डाटा के संग्रहण एवं सत्यापन सहित अपने दायित्वों का पालन करने के लिए आगे कार्य कर सके जबकि गठित उप कमेटी परिचालन बाधाओं पर ध्यान देगी। बहरहाल, इसके बावजूद नोटिसी एसएलए का अमल करने में विफल रहा।
यहां यह उल्लेखनीय है कि हरियाणा सरकार ने अपनी आर एण्ड आर नीति के तहत भू-मालिकों को वार्षिकी का वितरण करने की सेवा प्राप्त करने के उद्देश्य से बीमा कम्पनियों और बैंकों से बोलियां आमंत्रित करने के लिए फरवरी, 2011 में एक अभिरुचि की अभिव्यक्ति जारी की थी। मैसर्ज आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी द्वारा 31 मार्च, 2011 को बोली एवं निविदा दस्तावेज प्रेषित किए गए। तत्पश्चात्, वार्षिकी योजना के तहत लाभानुभोगियों के डाटा संग्रहण एवं सत्यापन के सम्बन्ध में सेवा प्रदाता के रूप में नोटिसी के दायित्वों सहित सेवा स्तरीय समझौते के प्रारूप में दिए गए विभिन्न नियमों एवं शर्तों के बारे बातचीत करने के लिए राज्य सरकार एवं नोटिसी के बीच बैठकों के अनेक दौर चले। सरकार द्वारा 25 जुलाई एवं 11 अगस्त, 2011 को चयनित बीमा कम्पनियों के बीच कार्य आवंटित करके पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति के तहत वार्षिकी की अदायगी करने का निर्णय लिया गया और नोटिसी को 6 सितम्बर, 2011 को एक पत्र के माध्यम से आशय पत्र जारी किया गया।
समझौते तथा आशय पत्र में स्वीकार शर्तों के आधार पर सरकार ने 4 जनवरी, 2012 को अपने द्वारा पूर्ण रूप से अनुमोदित एक एसएलए भेजा गया और नोटिसी को सम्बन्धित विभागों के साथ एसएलए हस्ताक्षर करने के लिए बुलाया। बहरहाल, एसएलए के निष्पादन के लिए बार-बार स्मरण पत्र भेजे जाने के बावजूद नोटिसी डाटा संग्रहण एवं सत्यापन से सम्बन्धित खण्ड को न हटाए जाने जैसे कुछ तुच्छ कारणों की वजह से अन्य कार्यों सहित इस कार्य को करने में विफल रहा। नोटिसी की इन आपत्तियों को सरकार द्वारा कभी भी स्वीकार नहीं किया गया था क्योंंकि सरकार ने इन्हें बोलीदाता या सेवा प्रदाता को दिया गया प्राथमिक कार्य माना है और इसके बारे नोटिसी को सूचित भी किया गया था। तत्पश्चात्, नोटिसी मैसर्ज आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी ने 2 मई, 2012 को एक पत्र के माध्यम से एसएलए को हस्ताक्षरित करने की असमर्थता दशाई।
मैसर्ज आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी को 20 जुलाई, 2012 को एक बैठक में सम्बन्धित विभागों से डाटा एकत्रित करने का परामर्श दिया गया । इसके बाद भी मैसर्ज आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी से कोई भी व्यक्ति विभागों से डाटा एकत्रित करने नहीं आया। इसके अतिरिक्त, बोलीदाता, मैसर्ज आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी ने 7 सितम्बर, 2012 को एक पत्र के माध्यम से पुनः वांछित सेवाएं उपलब्ध करवाने में अपनी अनिच्छा व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि एसएलए को निष्पादित करने से इन्कार करने के नोटिसी के आचरण ने सरकार द्वारा जनहित के नेक संवैधानिक लक्ष्य को पूरा करने के लिए शुरू की गई एक प्रशंसनीय नीति की अवेहलना की है। तत्पश्चात्, सरकार ने काफी विचार मंथन के उपरान्त 6 सितम्बर, 2011 के आदेश में नोटिसी को दिए गए कार्य को रद्द एवं वापिस ले लिया। उन्होंने कहा कि इसके बाद 22 नवम्बर, 2012 को नोटिसी को कारण बताने के लिए बुलाया गया कि मैसर्ज आईसीआईसीआई प्रुडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कम्पनी को भू-स्वामियों को वार्षिकी वितरित करने की समस्त प्रक्रिया में जानबूझ कर देरी करने तथा अपने दायित्वों को पूरा करने में विफल रहने के कारण हरियाणा सरकार या उसके किसी विभाग, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों या स्वायत्त निकायों के साथ कोई भी कार्य करने से तीन वर्ष की अवधि के लिए बहिष्कृत करने सहित कोई और अन्य कड़ी कार्यवाही तथा लागू कानून के तहत हरियाणा सरकार के पास उपलब्ध कोई ऐसी अन्य कार्यवाही क्यों न की जाए। सरकार को 21 दिसम्बर, 2012 को नोटिसी से जवाब प्राप्त हुआ। अपने जवाब में नोटिसी ने अपने द्वारा कोई भी गलत कार्य किए जाने या अपनी किसी विफलता से इंकार किया। नोटिसी द्वारा दिया गया जवाब पूर्णतःअसंतोषजनक था और उसमें कोई ठोस बात नहीं थी।