चंडीगढ़ 15 अप्रैलः हरियाणा पंजाबी साहित्य अकादमी, पंचकूला द्वारा कुरूक्षेत्र जि़ला के पिहोवा उपमंडल के डी.ए.वी. कॉलेज के सभागार में बैसाखी के पवित्र त्योहार को समर्पित एक पंजाबी कवि दरबार का आयोजन किया गया जिसमें समारोह के मुख्य अतिथि पिहोवा की एस.डी.एम. कमलप्रीत कौर एच.सी.एस. और अध्यक्षता अकादमी निदेशक सुखचैन सिंह भंडारी ने की। विशेष अतिथि के रूप में हरियाणा के जाने-माने साहित्यकार डा.रमेश कुमार उपस्थित हुए। इस कवि दरबार में हरियाणा और पंजाब से कवि और कवियत्रियों ने अपनी-अपनी कविताओं द्वारा बैसाखी उत्सव को अपनी कलम से छुआ। इसमें कुलवंत चावला ‘रफीक’, जोगिंदर सिंह ‘मुक्ता’, पूरन सिंह निराला, प्रदुम्न भल्ला, गुरचरन कौर कोचर, गुरप्रीत कौर गिल, मनजीत कौर अंबालवी, जसविंदर कौर ‘फगवाड़ा’ और सुखचैन सिंह भंडारी शामिल थे। लगभग हर कविता में ही बैसाखी के मेले, ढोल की थाप और गेहूं की सुगंध का रंग मिला हुआ था। जोगिंदर सिंह ‘मुक्ता’ के गीत में ‘खालसा पंथ की साजना’ का नज़ारा बहुत ही खूबसूरती पैदा कर गया, जिसमें गुरू गोबिंद सिंह जी की महानता को दर्शाया गया था। इसी प्रकार गुरचरन कौर कोचर की गज़ल में भी कनक के सिट्टों की लहलहाती फसल का जि़क्र काबिले-तारीफ था। कवि दरबार के साथ-साथ ‘कविता कैसे लिखी जाती है’, इस विषय पर सेमीनार में अपनी बात करते हुए यमुनानगर के डा.रमेश कुमार ने कहा कि कविता का आगाज़ कई बार अपने आप ही जेहन में से फूट कर बाहर आ जाता है और छोटी सी बात भी अचानक कविता का रूप धारण कर लेती है। इस अवसर पर मुख्य अतिथि कमलप्रीत कौर ने जहां अपनी जि़ंदगी की छोटी-छोटी घटनाओं को धीरे-धीरे बड़ा होते बताया वहीं यह भी कहा कि इसी प्रकार कविता की भी अचानक छोटी सी घटना से ही उत्पत्ति हो जाती है। निदेशक सुखचैन सिंह भंडारी ने हरियाणा सरकार द्वारा अकादमी की ओर से पंजाबी भाषा, पंजाबी साहित्य और पंजाबी संस्कृति का प्रचार-प्रसार करने लिए निरंतर अग्रसर है। हर महीने अलग-अलग स्थानों पर जा कर अलग-अलग साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित कर रही है, जिसका पंजाबी जगत् द्वारा हार्दिक अभिनंदन किया जा रहा है।