शिमला 7 अप्रैलः मुख्यमंत्री, श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश की राजधानी शिमला के बाहरी क्षेत्र में राज्य न्यायिक अकादमी की स्थापना की जाएगी। मुख्यमंत्री आज नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में राज्यों के मुख्यमंत्रियों तथा उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के सम्मेलन को सम्बोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य न्यायिक अकादमी स्थापित करने के लिए प्रदेश सरकार ने 3-41-061 हेक्टेयर भूमि आवंटित कर दी है। उन्होंने कहा कि अकादमी के निर्माण के लिए 37 करोड़ रुपये की धन राशि निर्धारित की गई है। इस राशि में से 26 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। सात करोड़ रुपये व्यय करने की स्वीकृति भी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि न्यायिक अकादमी में हर स्तर पर न्यायिक प्रबन्धन के लिए बेहत प्रशिक्षित तथा शिक्षित काडर तैयार किया जाएगा। अकादमी संस्थानों की कमियों पर भी नजर रखेगी
श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश में पंचायत स्तर पर लीगल ऐड क्लीनिक स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदेश में 10 मध्यस्थता केन्द्र स्थापित किए जा चुके हैं तथा त्वरित न्याय प्रदान करने के लिए 10 ए.डी.आर. केन्द्र (वैकल्पिक विवाद समाधान केन्द्र) स्थापित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लम्बित मुकद्मों के निपटारे के लिए तथा लोगों को प्रभावी न्याय प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के 10 पद सृजित किए गए हैं। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) के 2 न्यायालय भी सृजित किए गए हैं। शीघ्र ही इनकी अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में न्यायिक स्तर पर मामलों को शीघ्र निपटाने के लिए तीन ट्रैफिक मोबाईल न्यायालय स्थापित किए गए हैं। नैगोशियेबल इस्ट्रूमेंट अधिनियम की धारा 138 के अन्तर्गत मामलों के निपटारे के लिए चार विशेष न्यायाधीश नियुक्त किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार वित्तीय कठिनाईयों के बावजूद राज्य में न्यायपालिका को श्रेष्ठ अधोसंरचना सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। प्रदेश में उप मण्डल स्तर तक तैनात न्यायिक अधिकारियों को चिन्हित आवासीय सुविधा उपलब्ध करवा दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शैट्टी आयोग की सिफारिशों को अक्ष:रश लागू कर दिया गया है। न्यायिक अधिकारियों को शैट्टी आयोग द्वारा प्रदत्त वेतनमानों में संशोधन के लिए पद्मनाभन समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को भी राज्य में पूर्ण रूप से लागू कर दिया गया है।
श्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि देश भर के विभिन्न उच्च न्यायालयों में वर्तमान में लगभग 4 मिलियन मामले लम्बित हैं। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में वर्तमान में कुल 56,899 मामले लम्बित हैं। प्रदेश के अधीनस्थ न्यायालयों में लगभग 2.24 लाख मामले लम्बित हैं। जबकि देश भर के अधीनस्थ न्यायालयों में लगभग 27 मिलियन मामले लम्बित हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की न्यायपालिका देश की सर्वश्रेष्ठ न्यायपालिकाओं में से एक है और न्यायपालिका में और सुधार के लिए राज्य सरकार हर सम्भव सहयोग प्रदान करेगी।