शिमला 6 अप्रैलः प्रदेश सरकार द्वारा एकीकृत जलागम प्रबन्धन कार्यक्रम (आईडब्ल्यूएमपी) के अन्तर्गत एक दीर्घकालीन योजना तैयार की गई है, जिसके तहत 3112472 हेक्टेयर क्षेत्र को विकसित किया जाएगा। इस योजना के तहत कुल 4700 करोड़ रुपये 12 से 15 वर्ष की अवधि के दौरान व्यय किए जाएंगे। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्री अनिल शर्मा ने यह जानकारी आज यहां ग्रामीण विकास विभाग द्वारा आयोजित विकास नीति ऋण के लिए एकीकृत जलागम प्रबंधन कार्यक्रम के दिशा-निर्देशों के सुदृढ़ीकरण के लिए आयोजित कार्यशाला में दी।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने आईडब्ल्यूएमपी के अन्तर्गत अब तक 131 परियोजनाओं के लिए 1035.16 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इसके अधीन 690112 हेक्टेयर भूमि लाई गई है। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के अन्तर्गत आजीविका कमाने वाले परियोजना कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है ताकि जलागम क्षेत्र के अधीन लोग लाभान्वित हो सके। सरकार द्वारा आईडब्ल्यूएमपी को अन्य योजनाओं जैसे मनरेगा के अधीन भी लाया गया है। उन्होंने कहा कि पारम्परिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित बनाई जाएगी ताकि जल स्रोतों के संरक्षण के साथ-साथ लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
श्री अनिल शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार के प्रयासों से विश्व बैंक द्वारा सतत् व समावेश हरित विकास के लिए 1100 करोड़ रुपये का विकास नीति ऋण स्वीकृत किया गया है। इसके अन्तर्गत विभिन्न क्षेत्रों जैसे जलागम, उद्योग, पर्यटन इत्यादि क्षेत्रों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य वर्तमान एकीकृत जलागम प्रबन्धन कार्यक्रम की मार्गदर्शिका को सुदृढ़ बनाना है ताकि विकास नीति ऋण आसानी से प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास विभाग द्वारा नए उद्देश्य को लेकर एक योजना तैयार की गई है, जो वर्तमान मार्गदर्शिका को और सुदृढ़ बनाएगी। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि कार्यशाला के दौरान अपने बहुमूल्य सुझाव दें ताकि इस कार्यशाला के उद्देश्य को पूरा किया जा सके।
प्रधान सचिव, ग्रामीण विकास डॉ. ए.आर. सिहाग ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया तथा कार्यशाला के उद्देश्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एकीकृत जलागम प्रबन्धन कार्यक्रम की मार्गदर्शिका को और सुदृढ़ करने तथा संस्थागत कार्यक्रमात्मक पहलुओं पर भी गौर करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि मौसम बदलाव व आजीविका सम्बन्धित पहलुओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
कार्यशाला के दौरान विभिन्न सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा प्रस्तुतियां भी दी गई।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निदेशक श्री जे.सी. चौहान ने मुख्य अतिथि तथा कार्यशाला में भाग ले रहे सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि कार्यशाला के दौरान विचार विमर्श व प्रतिभागियों द्वारा दिए गए सुझाव एकीकृत जलागम प्रबन्धन कार्यक्रम की मार्गदर्शिका को सुदृढ़ करने में सहायक सिद्घ होंगे।