चण्डीगढ़, 6 अप्रैल- हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का धरोहर संग्रहालय हरियाणा प्रदेश के इतिहास और विकास की सही मायने में धरोहर है। इस संग्रहालय में दिखाए गए हरियाणवी संस्कृति के पहलुओं को देखकर युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। यह संग्रहालय भविष्य में हरियाणवी संस्कृति पर शोध केंद्र के रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वे आज कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय धरोहर संग्रहालय के दूसरे फेज़ का लोकार्पण करने के बाद सम्बोधित कर रहे थे। इससे पहले मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने विधिवत रूप से दूसरे फेज़ का लोकार्पण कर हवन यज्ञ में भाग लिया और पूरे संग्रहालय का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि धरोहर संग्रहालय के दूसरे चरण ने हरियाणा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। इसके लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय प्रशासन और तमाम कर्मचारी बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने अतीत और भविष्य के पहलुओं को जीवंत करने का प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि धरोहर संग्रहालय में हरियाणवी संस्कृति के हर क्षण को दिखाने का प्रयास किया है। इसके बावजूद अभी हरियाणवी संस्कृति के और अधिक पहलुओं को दिखाने का प्रयास भविष्य में भी किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के राखीगढ़ी में भी मोहनजोदड़ो से भी पुरानी सभ्यता के अवशेष मिले हैं। सरकार ने इस जगह को दुनिया का सबसे सुंदर अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन स्थल बनाने के लिए डेढ करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के धरोहर संग्रहालय को एक विशेष विज़न को लेकर तैयार किया गया है। आने वाली पीढि़यां इससे सीख लेंगी। इस संग्रहालय में कुम्हार, लोहार आदि प्राचीन सभ्यता के कारीगरों के जीवंत दृश्यों को दिखाने का अनोखा प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की तरफ से इस धरोहर संग्रहालय को करोड़ों रुपए की अनुदान राशि दी गई है। इसका और विस्तार करने और भव्य बनाने के लिए भविष्य में भी कभी धन की कमी नहीं आने दी जाएगी और इस संग्रहालय को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय बनाने का प्रयास किया जाएगा।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने धरोहर संग्रहालय में दान करने वाले पूर्व डीआईपीआरओ देव राज सिरोहीवाल, राजकिशन नैन, विनोद कुमार, गुलशन कुमार, चंद्रकला, जोगेंद्र सिंह, पवन जुलाना, अशोक गर्ग, मास्टर संत लाल, रामकुमार, मास्टर राजेंद्र, चौधरी कपूर सिंह, डा. अशोक, रामपाल, सुखबीर सिंह, रामचंद्र पुनया, नवरतन पांडे आदि को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया।
सांसद नवीन जिंदल ने कहा कि इस धरोहर संग्रहालय की प्रशंसा को थोड़े शब्दों में ब्यान नहीं किया जा सकता। उन्होंने वीसी डा. डीडीएस संधु व क्यूरेटर डा. महासिंह पुनिया तथा उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि दुनिया में अनेकों संग्रहालय देखे, परंतु कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का धरोहर संग्रहालय सबसे अनोखा संग्रहालय साबित हुआ है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के वीसी डा. डीडीएस संधु ने मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा कि इस संग्रहालय की नींव स्वतंत्रता सेनानी स्व. रणबीर सिंह हुड्डा ने 28 अप्रैल 2006 को रखी और द्वितीय चरण की नींव अक्टूबर 2007 में मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती आशा हुड्डा ने रखी। विश्वविद्यालय और हरियाणा प्रदेश वासियों का यह सौभाज्य है कि विकास पुरुष मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने धरोहर दूसरे फेज़ का लोकार्पण किया है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार का संग्रहालय दुनिया के किसी भी विश्वविद्यालय में बनाए गए संग्रहालयों से अनोखा है। 8 सालों में 10 लाख पर्यटक इसका अवलोकन कर चुके हैं और करीब पांच हजार लोगों ने इस संग्रहालय पर शोध कार्य किया है। धरोहर संग्रहालय के क्यूरेटर डा. महासिंह पुनिया ने कहा कि हरियाणा में इस प्रकार का संग्रहालय 1966 में ही बनना चाहिए था। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के ही प्रयासों से वर्ष 2006 में इस संग्रहालय की नींव रखी गई थी। 50 देशों के प्रतिनिधि इस संग्रहालय का अवलोकन कर चुके हैं। हरियाणवी संस्कृति का सरंक्षण करने में यह संग्रहालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश में विकास की झड़ी पहले ही लगा दी है। आज उन्होंने सांस्कृतिक विकास की झड़ी भी लगा दी है।
इस मौके पर सांसद नवीन जिदंल, हरियाणा ब्यूरो आफॅ पब्लिक एंटरप्राइजेज़ के चेयरमैन अनिल धंतौड़ी, हरियाणा भंडार निगम की चेयरमैन सुमिता सिंह, विधायक जिले राम सिंह, मुख्यमंत्री के राजनैतिक सलाहकार प्रो. वीरेंद्र सिंह, पूर्व विधायक रमेश गुप्ता, साहिब सिंह सैनी, भोपाल भाटी, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष जय भगवान शर्मा, वरिष्ट कांग्रेस नेता सुभाष सुधा, डा. कुलदीप ढींढसा, रामकुमार रम्बा, सुरेश रोड़, मेवा सिंह, आईजी बलबीर सिंह, डीसी मंदीप सिंह बराड़, एसपी राकेश आर्य सहित अधिकारी व मोजिज़ लोग मौजूद थे।