चण्डीगढ़ - हरियाणा सरकार ने आज केन्द्र सरकार से आग्रह किया कि वह पंचायती राज संस्थाओं को दो किश्तों की बजाए एक वार्षिक किश्त में धनराशि जारी करने की संभावना पर विचार करे ताकि प्रत्येक पंचायती राज संस्था को जारी की जाने वाली राशि को पर्याप्त बनाया जा सके।
हरियाणा के वित्त मंत्री श्री हरमोहिन्द्र सिंह च_ïा, जो आज नई दिल्ली में केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री पी चिदम्बरम की अध्यक्षता में हुई राज्यों तथा संघीय क्षेत्रों के वित्त मंत्रियों की पूर्व बजट परामर्श बैठक में बोल रहे थे, ने महात्मा गांधी राष्टï्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के दायरे एवं क्रियान्वयन को और सुधारने के लिये कुछ उपाय भी सुझाए।
उन्होंने कहा कि कच्चे माल की बढ़ती कीमतों को मद्देनजर रखते हुए सामग्री घटक, जिसमें अर्धकुशल एवं कुशल दिहाड़ी तथा ढुलाई लागत शामिल है, के लिये आंबटन की सीमा में कम से कम 50 प्रतिशत की वृद्घि की जानी चाहिए। इसीप्रकार, योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिये कार्मिक एवं तकनीकी सहयोग को विशेष रूप से ग्राम पंचायत स्तर पर सुदृढ़ किये जाने की आवश्यकता है। इसलिए, प्रशासनिक खर्च की सीमा को वर्तमान छ: प्रतिशत से बढ़ाकर दस प्रतिशत किया जाना चाहिए। परिसम्पतियों का स्थायित्व सुनिश्चित करने के लिये ग्रामीण संयोजिता के मामले में भूमि के संघनन के लिये रोड रोलरस जैसी सीमित विशिष्टï मशीनरी के इस्तेमाल के लिये इस शर्त के साथ अनुमति देने पर विचार किया जाना चाहिए कि मशीनरी का उपयोग शारीरिक श्रम विस्थापित न करे। इंदिरा आवास योजना के तहत मकानों के निर्माण में अपने श्रम के लिये मनरेगा के तहत मजदूरी की अदायगी करने पर विचार किया जा सकता है ताकि बढ़ती लागत को पूरा करने के लिये अतिरिक्त राशि उपलब्ध हो सके। बैकों को इंदिरा आवास योजना के तहत ऋण प्रदान करने में और अधिक उदार होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े होने के कारण हरियाणा के मेवात, झज्जर एवं रेवाड़ी जिलों को भी वर्ष 2013-14 में जिला सिरसा एवं महेन्द्रगढ़ के साथ पिछड़ा क्षेत्र अनुदान कोष कार्यक्रम के तहत कवर किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक आंगनवाड़ी केन्द्र के निर्माण के लिए मानक लागत को 4.50 लाख रुपये से संशोधित करके 8.50 लाख रुपये प्रति आंगनवाड़ी केन्द्र किया जाना चाहिए।
प्रदेश में अल्पसंख्यक समुदायों को दिये जा रहे ऋणों में धीरे-धीरे वृद्घि हुई जैसाकि सितम्बर, 2012 के अंत तक 4,91,981 लाभानुभोगियों के विरूद्घ 6161.11 करोड़ रुपये की बकाया राशि है, जबकि पहले 3,63,498 लाभानुभोगियों के विरूद्घ 5142.93 करोड़ रुपये थे जोकि राशि में 20 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज करता है। बहरहाल, जिला मेवात की अधिकतर आबादी मुस्लिम होने के कारण बैकों को वित्त प्रदान करने की दिशा में व्यापक कदम उठाने की आवश्यकता है क्योंकि गत एक वर्ष से अधिक समय के दौरान यहां खातों की संख्या लगभग स्थिर बनी हुई है। इसीप्रकार, दूसरे अल्पसंख्यक आबादी वाले जिला सिरसा में अल्पसंख्यक समुदायों की बकाया राशि सितम्बर, 2011 की तुलना में सितम्बर, 2012 के अंत तक 12 प्रतिशत तक कम हुई है।
उन्होंने यह भी आग्रह किया कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम, राष्ट्रीय विकलांग वित्त एवं विकास निगम, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम तथा राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम को आवधिक ऋण की शत-प्रतिशत वसूली करने की वर्तमान शर्त में छूट देते हुए उसे 70 प्रतिशत करने को कहा जाना चाहिए क्योंकि ऐसी वसूली विशेष रूप से संभव नहीं है।
हरियाणा राज्य कर सुधार लागू करने में हमेशा अग्रणी रहा है तथा राज्य जीएसटी लागू करने के लिए भारत सरकार और उच्चाधिकार कमेटी द्वारा की गई पहल का तहेदिल से समर्थन एवं प्रशंसा करता है। बहरहाल, एक मुख्य उत्पादक राज्य होने के कारण हरियाणा को जीएसटी व्यवस्था के तहत सीएसटी की जीरो रेटिंग के कारण भारी राजस्व हानि होगी और तदनुसार जीएसटी के तहत केन्द्र सरकार को दीर्घावधि आधार पर राज्य की भरपाई करनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, राज्यों द्वारा फाईल किये जाने वाले मुआवजा दावों की समस्त प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाया जाना चाहिए और इसके लिये एक स्वतंत्र निकाय होना चाहिए जिसमें उच्चाधिकार कमेटी के साथ निकट समन्वय में कार्य कर रहे विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हों।
उन्होंने कहा कि हमारे राज्य के लिये सीएसटी मुआवजे का मुद्दा अधिक महत्वपूर्ण है। गत वर्ष सीएसटी की दर को चार प्रतिशत से घटा कर दो प्रतिशत किये जाने से राज्य को 3100 करोड़ रुपये का घाटा वहन करना पड़ा और चालू वर्ष के लिये यह घाटा 3500 से 3600 करोड़ से अधिक होगा। गत वित्त वर्ष के साथ-साथ चालू वित्त वर्ष के घाटे की भरपाई न किये जाने से ऐसे घाटे का राज्य की वित्तीय स्थिति पर गहरा प्रभाव पडेगा। उन्होंने कहा कि हालांकि, सीएसटी मुआवजा मुद्दों पर विचार करने के लिए एक उप-कमेटी गठित की गई है। लेकिन फिर भी वे इस बात पर बल देंगे कि राज्यों द्वारा उठाये जा रहे सामान्य मुद्दों पर कार्यवाही करने से पहले उक्त वर्णित गणन त्रुटियों को दूर किया जा सकता है और दूर किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने हाल ही में वितरण बिजली निगमों के अल्पावधि दायित्वों को पुर्नगठित करने के लिए वित्तीय संस्थानों में आत्मविश्वास उत्पन्न करने हेतु इन निगमों के वित्तीय पुनर्गठन की एक योजना शुरू की है। इस पुनर्गठन ने राज्य सरकारों पर भारी वित्तीय भार डाला है। भारत सरकार को पुनर्गठन खर्च में अपने योगदान को बढ़ाना चाहिए। कोयले की कीमतों, रेल भाड़े की उच्च इनपुट लागत तथा कोयले की आपूर्ति की कमी के कारण निष्क्रिय क्षमता पर निर्धारित मूल्य की अदायगी के कारण उपभोक्ताओं को बिजली की दरों में वृद्घि का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार प्रधान मंत्री ग्रामीण स्वरोजगार योजना-2 शुरू करने वाली है जिसके तहत राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार द्वारा 50:50 के अनुपात से खर्च वहन करने का प्रस्ताव है, जबकि इसके बजाय प्रधान मंत्री ग्रामीण स्वरोजगार योजना-2 को राज्य एवं केन्द्र सरकार के बीच 25:75 के अनुपात के आधार पर शुरू किया जाना चाहिए।
वर्ष 2009-10 तक केन्द्रीय सडक़ कोष योजना के तहत धन राशि का आंबटन 60 प्रतिशत ईंधन खपत और 40 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर किया जाता था और फिर इसे संशोधित करके 30 प्रतिशत ईंधन खपत और 70 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर किया गया। इसके फलस्वरूप, हरियाणा का आंबटन 87 करोड़ रुपये से घटकर 57 करोड़ रुपये रह गया। चूंकि हरियाणा अपनी अधिक ईंधन खपत के कारण बड़ी राशि का योगदान दे रहा है, इसलिये पुराने मानदण्ड को पुन: बहाल किया जाना चाहिए।