चण्डीगढ़ - हरियाणा वित्त विभाग ने निर्णय लिया है कि राज्य सरकार के विभिन्न निगमों या विभागों द्वारा चलाई जा रही सोसायटीज को किसी भी प्रकार की खरीद या किसी कार्य के लिए वित्त वर्ष की समाप्ति पर किए जाने वाले अग्रिम भुगतान पहली मार्च के बाद टे्रजरी में भेजे गए बिल उपरान्त ही स्वीकृत किए जाएंगे।
वित्त विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि इस सम्बन्ध में सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों और उपमंडल अधिकारियों (नागरिक) को निर्देश जारी किए गए हैं।
सरकार के ध्यान में यह भी आया है कि अनेक विभाग राज्य सरकार के विभिन्न निगमों को खरीद या किसी कार्य के लिए वित्त वर्ष के अन्त में अग्रिम भुगतान करते हैं या हरियाणा सरकार के विभागों द्वारा चलाई जा रही विभिन्न समितियों को फण्ड उपलब्ध करवाते हैं। आम तौर पर ऐसे भुगतानों का इस्तेमाल उक्त वित्त वर्ष में किसी उपयोगी कार्य के लिए नहीं किया जाता क्योंकि किए जाने वाले आवश्यक कार्य या की जाने वाली खरीद वित्त वर्ष के अन्तिम दिन तक पूरी नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि समितियों या निगमों द्वारा आगामी वित्त वर्ष में कुछ महीनों के लिए इन फण्डस का उपयोग नहीं किया जाता। इसलिए यह आवश्यक है कि वित्त वर्ष में ली गई किसी भी अग्रिम राशि के वास्तविक उपयोग बारे टे्रजरी से ली गई राशि की तिथि से एक मास के भीतर या वित्त वर्ष के अन्त तक,जो भी पहले हो, टे्रजरी को सूचित किया जाए।
उन्होंने कहा कि यदि ली जाने वाली प्रस्तावित अग्रिम धनराशि एक करोड़ रुपये से अधिक है,तो ऐसे बिल टे्रजरी में वित्त वर्ष में 15 फरवरी या उससे पहले प्रस्तुत करने चाहिएं। इसके अतिरिक्त,ऐसे सभी मामले, जहां ऐसी अग्रिम राशि वित्त वर्ष के दौरान ली जाती है, में विस्तृत आकस्मिक बिल 25 मार्च तक टे्रजरी में भेजे जाने चाहिए। ऐसे सभी मामलों मे, जहां निगम या समिति वित्त वर्ष में अपेक्षित कार्य या अपेक्षित खरीद करने में असफल रहती है तो निगम या समिति से फण्डस वापिस ले लिए जाएंगे और वित्त वर्ष के अन्तिम कार्य दिवस तक विभागाध्यक्ष की रसीद उपरान्त राज्य टे्रजरी में वापिस जमा करवाए जाएंगे।