चण्डीगढ़ 21 मार्च- भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने आज कहा कि देश के विश्वविद्यालयों में अध्यापन, संकाय एवं अनुसंधान की गुणवत्ता को तुरन्त सुधारने की आवश्यकता है।
राष्ट्रपति मुखर्जी आज सोनीपत में ओ पी जिन्दल ग्लोबल विश्वविद्यालय में ‘भारत में विश्वविद्यालयों का भविष्य-एक ज्ञानवान समाज के लिए उच्चतर शिक्षा सुधारों पर तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य’ विषय पर आयोजित एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ कर रहे थे। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय विशेषज्ञ एवं अन्य प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।
विश्व के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों की सूची में एक भी भारतीय विश्वविद्यालय के शामिल न होने को गम्भीरता से लेते हुए राष्ट्रपति ने इस पर गम्भीर आत्मचिंतन किए जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ऐसा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने शिक्षा प्रणाली में गुणात्मक सुधार लाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा विश्वविद्यालयों को एकजुट होकर कार्य करने को कहा ताकि देश की शिक्षा प्रणाली को विश्व की श्रेष्ठ शिक्षा प्रणाली के बराबर बनाया जा सके । उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता, वहनीयता एवं पहुंच पर बल देते हुए एक सामान्य दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए। उन्होंने निजी क्षेत्र का आह्वान किया कि वे शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाए तथा शिक्षा के क्षेत्र में भी स्वास्थ्य, परिवहन तथा वित्त सेवाओं जैसे अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में प्राप्त अपनी सफलता को दोहराएं।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की अधिकतर आबादी युवा है तथा देश का जनसांख्यिकीय प्रोफाइल हमारे लिएवरदान सिद्घ हो सकता है। यदि हम अपनी इस युवा शक्ति की क्षमता का दोहन करने में सक्षम होंगे तभी यह हमारे लिए वरदान सिद्घ होगी और यदि हम ऐसा करने में असफल रहते हैं और उनकी ऊर्जा का सदुपयोग नहीं कर पाते तो हमें इसके भयानक एवं नकारात्मक परिणाम झेलने पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में भारत में औसत आयु 29 होगी जोकि अमेरिका में 40 वर्ष, जापान में 46 वर्ष और यूरोप के 47 वर्ष से बहुत कम है। उन्होंने सचेत किया कि अपनी युवा आबादी को उच्चतर शिक्षा एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करके ही हम अपने जनसांख्यिकीय का लाभांश प्राप्त कर सकते हैं।
मुखर्जी ने नवाचार की अपील करते हुए कहा कि राष्ट्र की नवाचार क्षमता से ही बड़े पैमाने पर राष्ट्र की प्रगति आंकी जाती है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र नवाचार के लिए जन्म स्थली बनने चाहिएं। उन्होंने उद्योग इन्क्यूबेशन पार्क विकसित करने,फैलोशिपस द्वारा शोध छात्रों की संख्या को बढ़ाने, अन्तरविश्वविद्यालय एवं अन्तराविश्वविद्यालय तालमेल के माध्यम से अन्तर विषयी अनुसंधान को प्रोत्साहित करने और उत्कृष्टता केन्द्रों को सशक्त करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि भारत के मुख्य प्रतिद्वंद्वियों की तुलना में नवाचार क्षमता के क्षेत्र में भारत के प्रदर्शन संकेतक उत्साहवर्धक नहीं हैं। उन्होंने विदेशों में कार्य कर रहे भारतीय विद्वानों को भारतीय विश्वविद्यालयों में अल्पावधि असाइनमैन्टस के रूप में महत्वपूर्ण अनुसंधान एवं शिक्षण के कार्यों में शामिल किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे ज्ञान एवं अनुभवों का आदान प्रदान करने में मदद मिलेगी। उन्होंने नवीन आविष्कारों को प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालयों को लैस करने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्हें एक परामर्शदाता की भूमिका निभाने को कहा।
राष्ट्रपति ने समाज के कमजोर वर्गों के लिए शिक्षा को वहनीय बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि योग्य विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, शिक्षा ऋण तथा स्व- सहायता योजना जैसे कार्यक्रमों को उदार बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी की क्षमता का दोहन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से राष्ट्रीय शिक्षा मिशन द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं का उपयोग करके मुख्य शहरों एवं कस्बों से दूर स्थित शिक्षण संस्थानों में प्रख्यात प्रौफेसरस के व्याख्यान प्रसारित किए जाने चाहिएं।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने इस अवसर पर बोलते हुए देश में मेधावी बच्चों को शिक्षा एवं अध्यापन की ओर आकर्षित करने, विद्यार्थियों को विज्ञान एवं गणित विषय लेने के प्रति प्रोत्साहित करने और शिक्षा के क्षेत्र में निवेश करने एवं शिक्षा के स्तर को सुधारने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि मेधावी विद्यार्थियों के विदेशों की ओर पलायन को रोका जा सकें।
श्री हुड्डा ने कहा कि शीर्ष विश्वविद्यालयों के मामले में पश्चिमी देशों का प्रभुत्व है और ये विश्वविद्यालय विश्वभर से बेहतरीन शिक्षाविदें एवं विद्वानों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे है। यह चिंता का विषय है कि विश्वभर के शीर्ष विश्वविद्यालयों की सूची में एक भी विश्वविद्यालय भारत से नहीं है। उन्होंने कहा कि यही मुख्य कारण है की हमारे उभरते प्रतिभावान युवा उच्चतर शिक्षा के लिए विदेश जाना पसंद करते हैं। यह हमारे समक्ष एक बहुत बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि हमें अपने विश्वविद्यालयों में बड़े पैमाने पर निवेश करना चाहिए ताकि हमारे कुछ विश्वविद्यालय विश्व के श्रेष्ठ विश्वविद्यालयों के अनुरूप बन सकें।
उन्होंने कहा कि उच्चतर शिक्षा को ज्ञान आधारित शिक्षा में परिणत करने की योजना बनाते समय शिक्षण संस्थानों को भौतिक सुविधाओं तथा शिक्षण गुणवत्ता के पैमाने को सुधारने के भी प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल वहीं अर्थ-व्यवस्था एवं समाज तरक्की कर सकेंगा जो उच्चतर शिक्षा एवं ज्ञान को प्रोत्साहित करने में सक्षम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल शिक्षा स्तर से ही इसकी शुरूआत की जाने चाहिए। युवाओं को विज्ञान एवं गणित विषय तथा अंगे्रजी भाषा पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। युवाओं को भौतिक विज्ञान पढ़ाने के अतिरिक्त उनमें वैज्ञानिक सोच विकसित किए जाने की भी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हम अपनी स्कूल शिक्षा में परिवर्तन लाने के साथ-साथ महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय शिक्षा में सुधार के लिए निवेश भी कर रहे हैं ताकि उच्चतर शिक्षा स्तर पर शिक्षा प्राप्त करने से पहले विद्यार्थी स्कूलों में भी गुणवत्तापरक शिक्षा प्राप्त करें।
उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य के बारे बोलना आसान होता है,लेकिन उसे साकार करना काफी कठिन है। इसके लिए सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में बडे़ पैमाने पर निवेश किए जाने की आवश्यकता है। श्री हुड्डा ने निजी क्षेत्र का आह्वान किया कि वह शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को और बल प्रदान करने के लिए बडे़ पैमाने पर भागीदारी करे।
ओ पी जिन्दल ग्लोबल विश्वविद्यालय द्वारा यह सम्मेलन आयोजित करने के लिए की गई पहल की सराहना करते हुए श्री हुड्डा ने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने ऐसी पहल करके एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है तथा अन्य कारपोरेट घरानों को इसका अनुकरण करना चाहिए।