चंडीगढ़ - हालही में कांग्रेस छोडक़र भाजपा में शामिल हुए नेताओं की सरकारी तंत्र में कोई सुनवाई नहीं हो रही है। केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह डूमरखां के बाद अब भिवानी-महेंद्रगढ़ के सांसद धर्मवीर ने अफसरशाही हावी होने का मुद्दा उठाया है। उन्होंने जनता व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए राज्य के मुख्य सचिव को इस बारे में पत्र लिखा है। हरियाणा में यह पहला मौका नहीं है जब जनप्रतिनिधियों ने अफसरशाही के खिलाफ आवाज उठाई है।
पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव के दौरान जींद क्षेत्र के जाट नेता बीरेंद्र सिंह डूमरखां और भिवानी के नेता धर्मवीर कांग्रेस छोडक़र भाजपा में शामिल हुए थे। धर्मवीर इस समय भिवानी से सांसद हैं तो बीरेंद्र सिंह राज्यसभा के माध्यम से केंद्र में मंत्री हैं। सत्ता परिवर्तन के बाद डूमरखां अक्सर मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के कार्यक्रमों में अक्सर अफरशाही के बेलगाम होने का आरोप लगाते रहे हैं। भाजपा विधायक दल की बैठकों में आमतौर पर विधायक भी अफसरों द्वारा सुनवाई न किए जाने के आरोप लगाते रहे हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री द्वारा आजतक इस मामले में कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
अब भिवानी के सांसद धर्मवीर ने भी अफसरशाही पर जनता के हितों की अनदेखी किए जाने का आरोप लगाते हुए अपनी नाराजगी को सार्वजनिक कर दिया है। धर्मवीर ने इस मामले को लेकर राज्य के मुख्य सचिव डीएस ढेसी को पत्र लिखा है। हालांकि इस पत्र में उन्होंने कहा कि अपनी बजाए सारी बात जनता के बारे में की है। धर्मवीर ने कहा है कि उनके पास आए दिन दर्जनों के संख्या में लोग शिकायतें लेकर आ रहे हैं कि फील्ड में तैनात छोटे-छोटे अधिकारी भी उनकी सुनवाई नहीं कर रहे हैं। लोग अपनी समस्याओं के संबंध में अधिकारियों को जब सरकारी मोबाइल नंबरों पर फोन करते हैं तो फोन का कोई जवाब नहीं दिया जाता।