गोहाना - देवीपुरा के निवासी गोविंदा (14) की संदेहपूर्ण हालात में मौत के मामले में शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि किशोर की मौत फांसी लगने से हुई है। इससे मामला और पेचीदा हो गया है। शुक्रवार को परिजन मांगें पूरी न होने तक शव का अंतिम संस्कार न करने पर अड़ गए। दोपहर 2.30 बजे पहुंचे डीसी और एसपी ने परिजनों को आश्वासन दिया जिसके बाद वे माने और अंतिम संस्कार किया। शव का पीजीआई रोहतक में डॉक्टरों के बोर्ड ने पोस्टमार्टम किया। अब सवाल यह उठ रहा है कि गोविंदा को फांसी पुलिस ने लगाई है या किसी और ने या फिर उसने खुद यह किया।
मृतक गोविंदा के घर के निकट ही लोग पुलिस और प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठ गए हैं। यहां पर जन संघर्ष मंच हरियाणा के प्रतिनिधि पहुंचे। मंच के प्रवक्ता नरेश ने मामले की सीबीआई से जांच, आरोपी पुलिस कर्मियों की बर्खास्तगी व सजा, पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा, एक सदस्य को सरकारी नौकरी आदि देने की मांग की। अन्य विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी मुख्य रूप से यही मांगें कीं। प्रतिनिधियों ने कहा कि दलितों पर अत्याचार बंद होना चाहिए। डा. अंबेडकर छात्र संगठन के प्रतिनिधि भी धरने में पहुंचे।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर भी पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंचे। उन्होंने मामले की सीबीआई से जांच की मांग की। मृतक गोविंदा के भाई गौतम का कहना है कि पुलिस ने उसके छोटे भाई को चोरी के मामले में पूछताछ के लिए थाने बुलाया था। पुलिस ने उसके भाई को छोड़ने के लिए पहले ढाई हजार और बाद में 5 हजार रुपये मांगे। उन्होंने पैसे दे दिए तो उसे शाम को छोड़ने की बात कही। शाम के समय गोविंदा की मां खाना लेकर थाने पहुंची तो पुलिस ने कहा कि वह थाने से भाग गया है, लेकिन वीरवार सुबह गोविंदा की एक बंद कमरे में लाश मिली थी।
दिल्ली की केजरीवाल सरकार की आम आदमी पार्टी के 6 विधायक शुक्रवार की देर शाम गोहाना पहुंचे तथा देवीनगर स्थित मृतक गोविन्दा के घर में परिजनों से मिले। विधायकों ने राखी बिड़लान, विशेष रवि, राजेन्द्र गौतम, मनोज कुमार, प्रकाश चंद और राजू धीमान शामिल थे। इन विधायकों ने फरीदाबाद के सुनपेड़ गांव के कांड की तर्ज पर गोहाना में भी एसआईटी के गठन की मांग की। आम आदमी पार्टी के विधायकों ने मुख्यमंत्री और पुलिस-प्रशासन के बयान पर सवालिया निशान लगाए। विधायकों ने कहा कि प्रदेश के दो स्थानों पर दलितों का उत्पीड़न अपने-आप में दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से प्रश्न किया कि एक आत्महत्या करने वाला व्यक्ति कैसे अपने ही हाथ-पांव तोड़ सकता है और कैसे प्लास से अपने नाखून उखाड़ सकता है।