मंडी - प्रदेश में बिगड़ती शिक्षा व्यवस्था को लेकर समाजिक संगठनों ने चिंता प्रकट की है। इस बाबत मंडी साक्षरता समिति भवन में प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेशभर के सामाजिक संगठन, शिक्षक प्रतिनिधि, अधिवक्ता और छात्र संगठनों ने भाग लिया। इस दौरान प्रदेश में समस्त अधिकारियों ने सरकारी स्कूलों के बिगड़ते हालात और शिक्षा का निजीकरण होने पर चिंता व्यक्त की गई। बैठक में दिल्ली से आरटीई फोरम राष्ट्रीय संयोजक अंबरीश राय ने कहा कि शिक्षा के अधिकार को लागू हुए पांच वर्ष हो गए हैं।
वहीं सांसद द्वारा निर्धारित समय भी समाप्त हो गया है, लेकिन देश में 10 प्रतिशत से कम स्कूलों में कानून के सारे प्रावधान लागू हो सके हैं। देश में अभी तक 12 लाख शिक्षकों की कमी है। छह लाख शिक्षकों को अनुबंध से नियमित करने की व्यवस्था करना बाकी है। उन्होंने बताया कि सर्वे के अनुसार प्रदेश में अधिकांश बच्चे सरकारी स्कूलों को छोडक़र निजी स्कूलों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं जो कि बिगड़ती व्यवस्था के कारण हो रहा है। शिक्षक प्रतिनिधि प्रवीण शर्मा ने कहा कि शिक्षकों को ट्रेनिंग के कार्यों में लगाने से भी शिक्षा पर विपरीत असर पड़ रहा है।
वहीं शिमला की एक संस्था की प्रवक्ता रूना ने स्कूलों पर किए गए सर्वे को प्रस्तुत किया। इस दौरान समस्त संस्थाओं ने सर्वसम्मति से आरईटी फोरम का गठन किया, जिसमें फोरम फॉर ह्यूमन राइट्स एंड जस्टिस की कार्यकारी निदेशक आत्रयी सेन को संयोजक चुना गया है।