दिल्ली - मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह मामले में हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के फैसले को देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अब इस मामले की सुनवाई 26 अक्तूबर को होगी। अतिरिक्त सोलिसीटर जनरल पीएस पटवालिया ने सीबीआई की तरफ से इस मामले की पैरवी की। सीबीआई ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करते हुए कहा है कि प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की गिरफ्तारी पर रोक लगाए जाने के कारण जांच एजेंसी को पूछताछ करने में दिक्कतें पेश आ रही हैं।
यही नहीं, आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में उच्च न्यायालय ने जांच को आगे बढ़ाने की अनुमति तो दी है, मगर हाई कोर्ट ने इस मामले में वीरभद्र सिंह से पूछताछ हाई कोर्ट की अनुमति लेने के बाद ही करने के आदेश दिए हैं। यह छूट उन्हें प्रदेश का मुख्यमंत्री होने के नाते और देश के संघीय ढांचे को बनाए रखने के लिए जरूरी बताई गई है। सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी बताया कि प्रदेश के उच्च न्यायालय ने यह भी कहा है कि यदि उनकी धर्मपत्नी प्रतिभा सिंह से पूछताछ की जानी है तो सीबीआई किसी महिला अधिकारी तथा प्रतिभा सिंह के वकील की उपस्थिति में ही पूछताछ करे।
पूछताछ से पहले उन्हें नोटिस जारी करने को भी कहा है। इन सभी निर्देशों के चलते सीबीआई के लिए मामले की जांच को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एचएल दत्तू ने सीबीआई की याचिका पर सुनवाई 26 अक्तूबर को निर्धारित कर दी है। गौरतलब है कि सीबीआई ने 26 सितंबर को वीरभद्र सिंह के घर समेत उनके 11 ठिकानों पर छापा मारा था। इस छापेमारी में वीरभद्र के घर से डीए घोटाले से संबंधित अहम दस्तावेज भी बरामद किए थे। उनके घर से मिले सबूतों के आधार पर सीबीआई ने उन्हें आय से अधिक संपत्ति का आरोपी बनाया है।
जिस दिन वीरभद्र के घर सीबीआई का छापा पड़ा, उस दिन उनकी बेटी की शादी थी। सीबीआई का आरोप है कि वीरभद्र सिंह ने यूपीए सरकार में इस्पात मंत्री के पद पर रहते हुए 2009-11 में 6.1 करोड़ रुपए की बेहिसाबी संपत्ति अर्जित की है। उधर, मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर करते हुए कहा था कि उनके निजी आवास व अन्य ठिकानों पर सीबीआई ने जो रेड की है, वह राजनीतिक प्रतिशोध की भावना व द्वेष से प्रेरित है।