नई दिल्ली - हरियाणा सरकार ने राज्य में होने वाले पंचायत चुनावों के लिए तय की गई न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की शर्त को वापस लेने से इनकार कर दिया है। राज्य सरकार के इस रुख के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले की कानूनी वैधता तय करने का फैसला किया है। साथ ही, कोर्ट ने प्रस्तावित स्थानीय पंचायत चुनावों को तब तक टालने का आदेश दिया है, जब तक कि इस मसले पर कानूनी स्थिति का फैसला नहीं हो जाता।
जस्टिस जे. चेलामेश्वर की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की एक बैंच ने सोमवार को दिए गए अपने फैसले में कहा था कि अगर राज्य सरकार उम्मीदवारों के लिए तय किया गया न्यूनतम योग्यता संबंधी अपना फैसला वापस ले लेती है तो वह चुनाव करवाने की मंजूरी दे देंगे। अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने बैंच से कहा कि राज्य सरकार के लिए अपना फैसला बदलना मुश्किल है। उन्होंने कोर्ट से विवादित मुद्दे पर फैसला सुनाने की अपील की।
बैंच ने इस मामले में अंतिम सुनवाई की तारीख सात अक्तूबर तय की है। अपना पक्ष मजबूती से रखेगा राज्यहरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि पंचायत चुनावों के संबंध में उच्चतम न्यायालय का आदेश सर्वोपरि है, लेकिन राज्य सरकार इस मामले में अपना पक्ष मजबूती से रखेगी। उनकी सरकार का निर्णय है कि पंचायत संस्थाओं में शिक्षित प्रतिनिधि चुन कर आएं, ताकि गांव का विकास अच्छी तरह से हो सके।