नयी दिल्ली - पंचायत चुनावों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को बड़ा झटका दिया है। शीर्ष अदालत ने हरियाणा पंचायती राज कानून में किए गये संशोधन पर रोक लगा दी है। इस संशोधन के जरिये सरकार ने पंचायत चुनाव के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम शैक्षिक योग्यता और अन्य नयी शर्तें लागू की थीं। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए 4 हफ्ते में जवाब मांगा है, जबकि पहले चरण का मतदान 4 अक्तूबर को होना है।
हरियाणा सरकार ने विधानसभा में 7 सितंबर को हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) विधेयक-2015 पारित किया था। इसके मुताबिक पंचायत चुनाव लडऩे के लिए महिलाओं और एससी वर्ग के पुरुष उम्मीदवारों का 8वीं और अन्य के लिए 10वीं पास होना अनिवार्य कर दिया गया। वहीं, एससी वर्ग की महिला उम्मीदवारों के लिए 5वीं पास होना अनिवार्य किया गया है। सरकार ने पर्चा भरने से पहले घर में शौचालय होने, सहकारी बैंक का लोन और बिजली बिल समेत सभी सरकारी देनदारियों का भुगतान निपटाने की शर्त भी लागू की थी।
शैक्षिक योग्यता पूरी न कर पाने के कारण चुनाव मैदान से बाहर हुए 3 लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में नये संशोधन के खिलाफ याचिका दायर की है। इस पर बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे. चेलामेश्वर और एएम सप्रे की पीठ ने 7 सितंबर को पारित किए गये हरियाणा पंचायती राज (संशोधन) विधेयक-2015 पर रोक लगा दी।
फतेहाबाद जिले के स्वामी नगर की राजबाला, हिसार के कैमरी गांव की कमेलश और झज्जर के भंभेवा बेरी गांव के प्रीत सिंह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार और राज्य चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि इस संशोधन से 83 फीसदी दलित महिलाओं और सामान्य वर्ग की 71 फीसदी महिलाओं के साथ ही 56 फीसदी पुरुषों के चुनाव लडऩे का मौलिक अधिकार प्रभावित होगा। इससे पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने संबंधित अध्यादेश पर रोक लगाई थी