शिमला - प्रदेश सरकार ने परियोजनाओं से मिलने वाली हिस्से की बिजली की पंजाब राज्य को हो रही सप्लाई बंद कर दी है। पंजाब के साथ सरकार का एग्रीमेंट पूरा हो गया है, जिसके चलते सप्लाई को रोका गया है। उधर बिजली बोर्ड ने भी बैंकिंग की बिजली में कटौती कर दी है। ये बिजली पंजाब, दिल्ली और यूपी को दी जा रही थी। बिजली बोर्ड को इन दिनों बिजली का संकट झेलना पड़ रहा है। बोर्ड ने पिछले सप्ताह सरकार से बिजली लेनी शुरू कर दी थी, लेकिन अब बैंकिंग में कटौती करने के बाद बोर्ड ने सरकार से भी कम बिजली की डिमांड की है।
बोर्ड सरकारी हिस्से की सिर्फ 36 लाख यूनिट रोजाना की सप्लाई ही लेगा और शेष कमी को बोर्ड बैंकिंग की बिजली में कटौती करके पूरा करेगा। प्रदेश की बिजली की जरूरत 260 लाख यूनिट रोजाना की है,जबकि उसका उत्पादन आधा रह गया है। इससे राज्य में बिजली के कट लगने की संभावना है। यहां बता दें कि जरूरत को पूरा करने के लिए बोर्ड को एक्सचेंज में नॉर्थ ग्रिड से भी बिजली खरीदनी पड़ रही है। उधर, सरकार ने विभिन्न परियोजनाओं से मिल रही हिस्से की बिजली में से 50 लाख यूनिट बिजली को रोजाना बेचना शुरू कर दिया है। ये बिजली एक्सचेंज में नार्थ ग्रिड को ही बेची जा रही है। पंजाब के साथ बोर्ड का करार समाप्त हो चुका है, लेकिन उसकी डिमांड पर दोबारा से ये बिजली दी जा सकती है।
राज्य सरकार को उसके हिस्से की बिजली की एवज में ग्रिड से एक्सचेंज में प्रति यूनिट तीन रुपए 60 पैसे की राशि मिल रही है। फिलहाल सरकार इस रेट को सही मान रही है क्योंकि अन्य राज्य जिनको बिजली की जरूरत है वह अधिक राशि देने को तैयार नहीं है। महंगी बिजली लेने की बजाय ये राज्य अपने यहां पर बिजली के कट लगा देते हैं। बिजली बोर्ड ने मंगलवार से पड़ोसी राज्यों की बैंकिंग की बिजली में 65 लाख यूनिट की कमी की है। इस तरह सरकार से और बैंकिंग की कटौती से बोर्ड के पास 115 लाख यूनिट बिजली अतिरिक्त उपलब्ध है। मगर जिस तरह से नदियों में जलस्तर कम हो रहा है तो लगता है कि आने वाले दिनों में संकट अधिक गहरा जाएगा।