टीहरा (घुमारवीं) - कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन की निर्माणाधीन सुरंग में शनिवार रात भारी मात्रा में मलबा गिरने से तीन मजदूर की मौत हो गई। हादसे के समय सुरंग के भीतर एक दर्जन मजदूर काम में लगे थे, लेकिन मलबा गिरने से मचे हडक़ंप के बीच नौ मजदूर तत्काल बाहर की ओर भाग निकले, जबकि हड़बड़ी में तीन मजदूर बचाव के लिए गलती से बाहर के बजाय अंदर की ओर भाग गए। इसी बीच सुरंग के बीच मलबा भर जाने से तीनों मजदूर अंदर ही फंस कर रह गए। टिहरा गांव से कीरतपुर-नेरचौक हाईवे के लिए बलोह तक बनाई जा रही सुरंग के 120 मीटर अंदर ये मजदूर फंस गए थें।
रविवार सुबह इसकी सूचना मिलते ही कंपनी के अधिकारियों के साथ ही स्थानीय लोग भी मौके पर पहुंच गए। बताया जा रहा है कि सुरंग में मलबा गिरने के कारण ऑक्सीजन की पाइप भी क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे सुरंग में फंसे तीनों व्यक्तियों के जीवित होने की उम्मीद बेहद कम है। हालांकि कंपनी ने सुरंग के अंदर ऑक्सीजन पहुंचाने की वैकल्पिक व्यवस्था कर दी है। फंसे लोगों को जीवित बाहर निकालने के लिए जिला प्रशासन ने सीमा सडक़ संगठन (बीआरओ) को भी बुलाया है। यहां बता दें कि हिमालयन कंस्ट्रक्शन कंपनी सुरंग का निर्माण कर रही है। इसी कंपनी ने मंडी-कुल्लू सडक़ पर बनी औट टनल का काम भी किया था। 1250 मीटर लंबी सुरंग में मलबा गिरने के कारण तीन मजदूरों के फंसने से सुरंग का निर्माण करवा रही कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
बताया जा रहा है कि सुरंग में करीब तीन महीने पहले चार मीटर दरार पड़ी थी। सुरंग में कार्यरत मजदूरों ने निर्माण कर रही कंपनी प्रबंधन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। इस सुरंग में काम कर रहे मजदूरों अमर सिंह, प्रकाश चंद राणा आदि ने बताया कि यह घटना कंपनी की लापरवाही की वजह से हुई है। मजदूरों ने बताया कि सुरंग के जिस क्षेत्र में यह हादसा हुआ है वहां पर रिब नहीं लगाए गए थे। यहां पर लैटिस गार्डर होते तो भी मलबा सुरंग में गिरने से बच जाता। दरार पडऩे पर कंपनी को आगाह किया था कि यहां पर कभी भी अप्रिय घटना घट सकती है, लेकिन उस समय कंपनी ने उनकी बातों पर गौर नहीं किया। यदि सुरंग के अंदर रेब मशीन होती तो भी मजदूर सुरंग में नहीं फंसते।