हमीरपुर — प्रदेश के इंजीनियरिंग कालेजों की सीटों पर कैंची चलाई गई है। एफिलिएशन नॉर्म्ज पूरा न होने पर एक दर्जन कालेजों की 400 से ज्यादा बीटेक की सीटें कम कर दी हैं। अहम है कि ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (एआईसीटीई) द्वारा अलॉट की गई बीटेक की इन सीटों पर तकनीकी विश्वविद्यालय ने चाबुक चलाया है। एआईसीटीई ने हिमाचल के इंजीनियरिंग कालेजों के लिए कुल 7680 बीटेक की सीटें मंजूर की हैं।
संबद्धता के निर्धारित मापदंडों पर खरा न उतरने वाले राज्य के 11 प्राइवेट कालेजों की 410 सीटें कम कर दी हैं। यह पहली बार हुआ है कि एआईसीटीई द्वारा अलॉट की गई सीटों को विश्वविद्यालय ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करके कम किया है। इंजीनियरिंग दाखिले में मैनेजमेंट कोटे की 15 प्रतिशत सीटें निर्धारित की गई हैं। प्रस्तावित बीटेक दाखिले के लिए अब यह नई शर्त लागू कर दी गई है। कैबिनेट में लिए गए फैसले के अनुसार हिमाचल प्रदेश के सभी इंजीनियरिंग कालेजों में सीटों का आबंटन केटागरीवाइज होगा।
इसके तहत ऑल इंडिया लेवल के छात्रों के लिए 15 प्रतिशत सीटें निर्धारित की गई हैं। हिमाचल प्रदेश को इंजीनियरिंग एडमिशन में 65 प्रतिशत सीटें भरी जाएंगी। प्रदेश सरकार ने मैनेजमेंट सीटों पर भी राहत भरी नजरें दौड़ाई हैं। कालेज प्रबंधकों को भारी राहत देते हुए मैनेजमेंट की सीटों का कोटा 15 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। 100 प्रतिशत इस कोटे के अलावा सरकार ने एआईसीटीई के निर्धारित मापदंडों को अपनाते हुए सुपर न्यूमरी सिस्टम फोलो किया है।
इसके तहत 100 प्रतिशत कोटा पूरा होने के बाद भी 22 प्रतिशत सीटें भरने का प्रावधान रखा गया है। इसके तहत नॉन रेजिडेंट इंडियन (एनआरआई) को पांच प्रतिशत सीटें मिलेंगी। इसके अलावा विदेशी स्टूडेंट्स को भी कोटे में शामिल किया गया है। विदेशी छात्रों के लिए 15 प्रतिशत कोटे में प्रावधान किया गया है। इसके अलावा दो प्रतिशत सीटें कश्मीरी छात्रों के हिस्से रखी गई हैं। इससे पहले प्रदेश के इंजीनियरिंग कालेजों में सीटों का कोटा निर्धारित नहीं था।