चंडीगढ़ - हरियाणा विधानसभा में मानसून सत्र के दौरान कार्यवाही शुरू होते ही जाट आरक्षण के मुद्दे पर विधानसभा में हंगामा हो गया। विपक्षी दल इनेलो ने सरकार से इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग करते हुए काम रोकने का प्रस्ताव रख दिया। अभय चौटाला का तर्क था कि जाट आरक्षण के मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं व मंत्रियों के बयानों में विरोधाभास है। पार्टी इस मुद्दे पर अपना स्टैंड स्पष्ट करे। उन्होंने इस मामले पर चर्चा के बाद विधानसभा की तरफ से संयुक्त प्रस्ताव पारित करवाने की मांग उठाई। इनेलो का तर्क था कि प्रश्नकाल को बीच में ही रोककर पहले इस मुद्दे पर चर्चा की जाए। विधानसभा स्पीकर कंवरपाल गुर्जर ने तर्क दिया कि यह मामला नया नहीं है।
हाल में ऐसी कोई गंभीर घटना नहीं हुई जिस पर चर्चा की जाए। दूसरा यह मामला अदालत में भी लंबित है। अदालत इस पर अपना फैसला दे चुकी है। वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने भी इस बात पर सरकार का पक्ष रखा। इनेलो विधायकों ने कुरूक्षेत्र के सांसद राजकुमार सैनी को आगे रखकर विवाद खड़ा करते हुए कहा कि भाजपा के कई मंत्री जाट आरक्षण के पक्ष में बात कर रहे हैं जबकि सांसद विरोध में आंदोलन खड़ा कर रहे हैं। इस बात पर अनिल विज भडक़ गए और उन्होंने कहा कि राजकुमार का इस सदन से कोई सरोकार नहीं है। वह अपना स्पष्टीकरण लोकसभा में देंगे।
इनेलो ने सरकार को घेरते हुए कहा कि वह भी कई बार सदन में राबर्ट वाड्रा और राजीव गांधी का नाम लेते हैं। कांग्रेस विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने भी इस मुद्दे पर इनेलो का समर्थन करते हुए सरकार से आरक्षण के मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठाई। इसी दौरान इनेलो विधायकों ने सदन के भीतर सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। इस पर सदन के नेता मनोहरलाल खट्टर खड़े हुए और उन्होंने विपक्ष को इस बात के लिए राजी किया कि इस मुद्दे पर बाद में चर्चा की जाएगी।