शिमला - शुक्रवार को हिमाचल विधानसभा में 33 साल बाद काला इतिहास दोहराया गया और सदन में माननीयों के बीच हाथापाई हो गई। प्रश्नकाल के बाद जैसे ही एजेंडे पर आगामी कार्यवाही शुरू हुई, भाजपा की तरफ से विधायक गोबिंद ठाकुर ने प्वाइंट ऑफ आर्डर का हवाला देकर गत दिनों संजौली डिग्री कालेज में छात्रों व प्रिंसीपल के बीच उपजे कथित विवाद पर ध्यान आकर्षित करना चाहा, मगर विधानसभा अध्यक्ष ने संबंधित रिपोर्ट नहीं मिलने की बात कह कर इसकी अनुमति नहीं दी।
इस पर सदन में हो-हल्ला शुरू हो गया। विधानसभा अध्यक्ष ने व्यवस्था दी कि प्वाइंट ऑफ आर्डर तभी मंजूर हो सकता है, यदि संबंधित विषय उनके सामने हो, मगर विपक्ष नहीं माना। दोनों पक्षों के बीच इस मुद्दे पर तनातनी बढ़ती गई। सत्तापक्ष व विपक्ष के सदस्यों ने जोरदार नारेबाजी की। इसी बीच विपक्ष की तरफ से विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने सीपीएस नीरज भारती को कुछ ऐसे शब्द कह दिए, जिस पर बवाल उठ गया। यह शांत भी हो गया, क्योंकि विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल ने प्वाइंट ऑफ आर्डर के तहत व्यवस्था बताई। इसी बीच मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने विधायक सतपाल सिंह सत्ती द्वारा सीपीएस नीरज भारती को कहे गए कुछ शब्दों पर एतराज जताया।
उधर, नीरज भारती ने अपनी सीट पर खड़े होकर जबरदस्त विरोध किया व ऐसे शब्द बाण सतपाल सिंह सत्ती पर छोड़ दिए, जिससे विपक्ष आग बबूला हो उठा। बस फिर क्या था, दोनों तरफों के माननीय अपनी सीटों पर से उठ गए और कुछ एक-दूसरे को उकसाते रहे। विपक्ष सदन के बीचोंबीच वेल में आ गया और कुछ विधायकों के बीच हाथापाई देखने को मिली। इसी बीच विधायक व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने आरोपों पर आधारित कुछ कागज मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समक्ष जाकर उन्हें देने चाहे, जो उन्होंने नहीं लिए। सत्ती ने इन्हें वापस मुख्यमंत्री की ही तरफ मोड़ दिया, इस पर भी विवाद बढ़ा।
यदि उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री, शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा, विधायक आशा कुमारी व परिवहन मंत्री जीएस बाली बीच-बचाव को नहीं आते तो नौबत हाथापाई से आगे भी जा सकती थी। इसी बीच बात बढ़ती देखकर विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 12:20 से 12:35 बजे तक स्थगित कर दी। कार्यवाही जब फिर से 12:35 बजे शुरू हुई तो विपक्षी सदस्यों ने विरोध स्वरूप सदन के बीचोंबीच आकर नारेबाजी जारी रखी। उन्होंने कार्यवाही में भी हिस्सा नहीं लिया।