चंडीगढ़,15 जनवरी- हरियाणा के सिरसा जिला में नरमा कपास की खड़ी फसल में गेंहू की सीधी बिजाई करने के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इस जिला में 160 एकड़ भूमि पर कृषि प्रौद्योगिकी प्रबन्धन एजैंसी (आत्मा) स्कीम के तहत कृषि विभाग द्वारा सीधी बिजाई करवाई गई है। इस सीधी बिजाई से जहां कपास उत्पादन में किसानों को डेढ से अढ़ाई क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन का लाभ हुआ है वहीं चार से पांच क्विंटल तक गेंहू के उत्पादन में भी इज़ाफा होगा। इस प्रकार से गेंहू की रिले सोईंग यानि सीधी बिजाई किसानों के लिए आम के आम गुठलियों के दाम वाली बात होगी। पूरे हरियाणा में कृषि विभाग द्वारा कपास की खड़ी फसल में 500 एकड़ भूमि पर सीधी बिजाई करने का लक्ष्य रखा गया था, जो विभाग द्वारा पूरा किया गया। सिरसा जिला में सबसे अधिक 160 एकड़ पर सीधी बिजाई का लक्ष्य रखा गया था। जिला के प्रत्येक खण्ड में 23 एकड़ भूमि पर गेंहू की सीधी बिजाई करवाई गई। विभाग द्वारा किसानों को आत्मा स्कीम के तहत प्रति एकड़ दो हजार रुपए के इन्पुट्स दिए गए जिसमें खाद, बीज और खरपतवारनाशक शामिल हैं। इस प्रकार से आत्मा स्कीम के तहत पूरे प्रदेश में गेंहू की सीधी बिजाई के लिए 10 लाख रुपए की राशि के इन्पुट्स दिए गए। सीधी बिजाई की यह योजना हरियाणा के कपास उत्पादक 11 जिलों में शुरू की गई है। सिरसा जिला में सबसे अधिक बिजाई करवाई गई। कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक (कॉटन)आर सी पूनिया ने बताया कि विभाग की आत्मा योजना के तहत जिला में प्रदर्शनी प्लांट लगाए गए। गत वर्ष भी इसी योजना के तहत कई प्रदर्शनी प्लांट लगाए गए थे जिनके सार्थक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि कपास की खड़ी फसल में सीधी बिजाई करने से इस बार कपास दो क्विंटल तक अधिक हुई है,क्योंकि जिस कपास की फसल के टिंडों के खिलने में देरी होने का अंदेशा था,उस कपास की फसल में गेंहू की सीधी बिजाई करवाई गई। किसानों ने पाया कि प्रति एकड़ में अढाई क्विंटल तक अधिक कपास हुई। पहले जहां किसानों को गेंहू बिजाई के लिए कपास के टिंडे तोड़कर फसल काटनी पड़ती थी उसमें मात्र दस प्रतिशत कपास ही किसान के हाथ लगती थी।
उन्होंने बताया कि गेंहू की सीधी बिजाई करने से किसान को खर्च भी कम करना पड़ता है। गेंहू की बिजाई छिंटा विधि या गुड़ाई करके की जाती है। दोनों ही विधियों में खर्च कम आता है वहीं गेंहू के उत्पादन में भी बढ़ौतरी चार से पांच क्विंटल तक पाई गई। सिरसा जिला के कई गांवों में रिले सोईंग यानि सीधी बिजाई के प्रदर्शनी प्लांट लगाए गए जिनमें खैरेकां, हांडीखेड़ा, माधोसिंधाना, सुचान कोटली शामिल है। कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों की टीम ने इन गांवों में प्लांटों का दौरा किया और किसानों से बातचीत की। किसानों को फसल प्रबन्धन के टिप्स दिए तथा खरपतवारनाशक दवाईयों के बारे में बताया।
उप कृषि निदेशक श्री अमरजीत कुल्डि़या, जो टीम में शामिल थे, ने बताया कि गेंहू की बिजाई का सही समय नवम्बर के अन्तिम सप्ताह से दिसम्बर के अन्तिम सप्ताह तक होता है। चूंकि किसानों को ज्यादातर गेंहू की फसल की कपास फसल की कटाई के बाद बिजाई करनी होती है। ऐसे में किसानों को लगे कि उनकी कपास की फसल देर तक खिलेगी तो वे समय पर ही गेंहू की सीधी बिजाई कर सकते हैं जिससे उन्हें दो तरफा लाभ मिलेगा और विभाग द्वारा भी आत्मा व अन्य स्कीमों के तहत लाभन्वित किया जाएगा।