शिमला - मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने विधानसभा के सदन में साफ कर दिया है कि मंत्री और विधायक अब उनके पास टीचर्स की ट्रांसफर के डीओ लेकर न आएं। एक ओर शिक्षा की गुणवत्ता के लिए बीच सेशन में तबादला न करने के सुझाव दिए जा रहे हैं और दूसरी ओर तबादलों की सिफारिशें की जाती हैं। सीएम ने कहा कि ऐसे भी कई मामले उनके ध्यान में आए हैं, जहां टीचर पहली नियुक्ति में भी एडजेस्टमेंट को सिफारिशें लेकर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि टीचर दूर-दराज के क्षेत्रों में पढ़ाने नहीं जाएगा, तो वहां शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा? केवल विशेष परिस्थितियों में ही एडजेस्टमेंट की जाएगी।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि स्कूलों में अध्यापकों की गैर हाजिरी रोकने के लिए उपनिदेशक इंस्पेक्शन के पद भरे जाएंगे। ये सरप्राइज इंस्पेक्शन करेंगे और अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई होगी। सीएम ने कहा कि कुछ स्कूलों में दो-दो टीचर हैं। वहां पर एक टीचर एप्लीकेशन रखकर छुट्टी पर चला जाता है। यदि इंस्पेक्शन हुई तो दूसरा टीचर एप्लीकेशन दिखा देगा। नहीं हुई तो अगले दिन इसे फाड़ देते हैं। ऐसा अब नहीं चलेगा। स्कूलों में बॉयोमीट्रिक मशीनें लगाने का कार्य चरणबद्ध तरीके से चल रहा है। मुख्यमंत्री भाजपा विधायक कर्नल इंद्र सिंह द्वारा लाए गए संकल्प प्रस्ताव का जवाब दे रहे थे।
इसके बाद ध्वनिमत से संकल्प प्रस्ताव गिर गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि बेचलर ऑफ वोकेशनल कोर्स विवि स्तर पर भी शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। स्कूल स्तर पर वोकेशनल एजुकेशन से 524 छात्रों को रोजगार भी मिल गया है। 10वीं और 12वीं की परीक्षा में 10 हजार टॉपर्स को लैपटॉप दिए जाएंगे। साइंस, कॉमर्स और गणित जैसे विषयों को बढ़ावा देने के लिए मापदंड बदले हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि खराब परीक्षा परिणाम देने वाले अध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई व अच्छा रिजल्ट देने वालों को प्रशस्ति पत्र दिए जाएंगे। इससे पूर्व संकल्प प्रस्ताव पेश करते हुए विधायक कर्नल इंद्र सिंह ने शिक्षा के ढांचे को बदलने की आवश्यकता पर बल दिया। आईडी धीमान, आशा कुमारी, महेश्वर सिंह, हंसराज, विजय अग्निहोत्री, नंद लाल, जय राम और नीरज भारती ने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए अहम सुझाव दिए।