चंडीगढ़ - हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा है कि अगर पेंशन के भुगतान में पारदर्शिता न आई तो वह जनता के लिए संघर्ष करने के लिए मजबूर होंगे। इसके लिए सीधे तौर पर सरकार जिम्मेदार होगी। उन्होंने कहा कि केन्द्र तथा प्रदेश सरकारों को हर मोर्चे पर विफल करार देते हुए हुड्डा ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के लिए शैक्षणिक योग्यता आठवीं और दसवीं करने के सरकारी फैसला पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है। उन्होंने कहा कि अगर गत पंचायत चुनावों के आंकड़ों पर गौर किया जाये तो इस फैसले से सामान्य श्रेणी के 60 प्रतिशत पुरूष व 81 प्रतिशत महिलाएं चुनाव लडऩे से वंचित रह जाएंगी वहीं अनुसूचित जाति के 62 प्रतिशत पुरूष व 83 प्रतिशत महिलाएं अपना चुनाव लडऩे का संवैधानिक अधिकार खो देंगे।
ऐसे में सरकार जवाब दे कि क्या यह 71 प्रतिशत लोग केवल वोट डालने की मशीन मात्र हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह शिक्षा के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसा कानून पहले ऊपर से लागू होना चाहिए तथा इसे कम-से-कम पांच वर्ष पूर्व बताया जाना चाहिए। मौजूदा सरकार को पेंशन के मुद्दे पर घेरते हुए हुड्डा ने कहा कि गत चुनाव में 2000/- रूपये मासिक पैंशन देने का वायदा करके वोट बटोरने वाली भाजपा की सरकार ने सम्मान पैंशन देने के नाम पर बुजुर्गों को अपमानित करना शुरू कर दिया है। उनकी सरकार 23 लाख से अधिक लोगों को पैंशन देती थी और यह पैंशन हर मास के पहले सप्ताह में घर बैठे मिल जाती थी। वर्तमान सरकार का दावा है कि उन्होंने दस लाख लोगों की पैंशन उनके खातों में डाल दी है। सरकार बताए कि शेष 13 लाख लोगों का क्या होगा।
उन्होंने भाजपा को अपने घोषणा पत्र के अनुसार मासिक पेंशन 2000 रुपए करने, पैंशन वितरण का कार्य पैंशनधारियों की मर्जी से करने, पैंशन का भुगतान हर महीने के प्रथम सप्ताह में करने की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि अगर 31 अगस्त तक सरकार ने इसमें सुधार नहीं किया तो वह जनता के लिए संघर्ष करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने प्रदेश में सफेद मक्खी के प्रकोप से बर्बाद हुई कपास की फसल की तुरन्त गिरदावरी करवा कर प्रभावित किसानों को भरपूर मुआवजा देने की मांग करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने किसानों की हालत को दयनीय बना दिया है।