धर्मशाला — जल्द ही शिमला, कांगड़ा और कुल्लू में एग्रीकल्चर सर्विस सेंटर खोले जाएंगे। एकीकृत सहकारी विकास परियोजना के तहत प्रदेश में खोले जाने वाले कृषि केंद्रों में किसानों को हर प्रकार की सहायता मिल सकेगी। नेशनल प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश में पैदावार बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। कृषि के विकास के लिए को-आपरेटिव सोसायटियां विशेष रूप से कार्य करेंगी। नेशनल डिवेलपमेंट को-आपरेटिव सोसायटी नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित एकीकृत सहकारी विकास परियोजना के तहत प्रदेश में अब कृषि पैदावार बढ़ाने और किसानों की समस्याओं को सुलझाने के लिए योजना बनाई गई है।
विकास परियोजना के तहत कांगड़ा को 39.61 करोड़, शिमला को 20.90 और कुल्लू को 21.81 करोड़ रुपए का बजट जारी किया गया है। नेशनल डिवेलपमेंट प्रोग्राम के तहत प्रदेश के उक्त तीनों जिलों में एग्रीकल्चर सर्विस सेंटर खोले जाएंगे। को-आपरेटिव सोसायटियों द्वारा चलाए जाने वाले एग्रीकल्चर सर्विस सेंटर में किसानों को सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की जाएगी। सर्विस सेंटर में किसानों को कृषि संबंधी सलाह देने के लिए विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी।
इसके साथ ही उत्तम किस्म के बीज उपलब्ध करवाए जाएंगे। इतना ही नहीं, किसानों को ऋण प्रदान करने सहित आधुनिक उपकरण खरीद के लिए भी सबसिडी प्रदान की जाएगी। इससे को-आपरेटिव सोसायटियों के सदस्यों का पूर्ण रूप से विकास हो सकेगा। कृषि को समृद्ध करके सोसायटियों को विकास करने की स्पष्ट हिदायत दी गई है। एग्रीकल्चर सर्विस सेंटर में भूमि की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने के लिए भी कार्य किया जाएगा। बहरहाल, अब प्रदेश के तीन जिलों के किसानों को विशेष एग्रीकल्चर सर्विस सेंटर के कृषि की सुविधा मिलेगी।