कुल्लू - हादसे के बाद प्रदेश सरकार ने मणिकर्ण गुरुद्वारे को खाली करने के आदेश दिए हैं। कुल्लू के एसडीएम ने प्रबंधकों को नोटिस जारी कर गुरुद्वारा भवन बंद करने को कहा है। साथ ही कुल्लू प्रशासन ने जिले में ऐसे सभी धार्मिक स्थलों की सुरक्षा की फिर से समीक्षा के आदेश भी दे दिए हैं जहां श्रद्धालुओं की आवाजाही अधिक है। संवदेनशील क्षेत्रों में स्थित धार्मिक स्थलों पर निगरानी रखने के आदेश भी दिए हैं।
प्रशासन का कहना है कि पिछले कई सालों के दौरान सरकार की बिना अनुमति से गुरुद्वारे के आसपास अवैध तौर पर भवन निर्माण किया गया है जो असुरक्षित है। जहां एक ओर पहाड़ की तरफ से होने वाले भूस्खलन का खतरा है, वहीं दूसरी तरफ पार्वती नदी में उफान तबाही का कारण बन सकता है। इसके साथ ही जिस जगह पर गुरुद्वारा भवन का निर्माण किया गया है वह वन भूमि है। वन भूमि पर किसी भी तरह के निर्माण की इजाजत नहीं दी जा सकती। मणिकर्ण हादसे में जिन श्रद्धालुओं की मौत हुई है वे पिछले पांच साल से लगातार यहां आ रहे थे। हादसे के अगले दिन यानी बुधवार को उन्हें यहां से लौटना था। पंजाब के संगरूर जिले के रोगला तलवा मंडी गांव के रहने वाले ये श्रद्धालु नयनादेवी के दर्शन करने के बाद मणिकर्ण पहुंचे थे। ये सभी मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आए थे।
कुल्लू के एसडीएम की तरफ से आज मणिकर्ण गुरुद्वारे को नोटिस जारी किया गया है जिसमें कहा गया है कि गुरुद्वारे को खाली न करने की स्थिति में गुरुद्वारा प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगर कोई हादसा होता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी गुरुद्वारा प्रबंधन की होगी। प्रशासन का कहना है कि यहां निर्माण इस कद्र बेतरतीब ढंग से किया गया है कि कभी भी कोई हादसा हो सकता है। खासतौर पर जिस जगह चट्टान गिरी है उस जगह तीन-चार और बड़ी-बड़ी चट्टानें गिरने का खतरा है। इसके अलावा गुरुद्वारे के पीछे वाली पहाड़ी से होने वाला भूस्खलन भी गुरुद्वारे के लिए खतरा बन सकता है।