चण्डीगढ़ : हरियाणा बिजली वितरण निगम राज्य में बिजली आपूर्ति के लिए पंजाब की तर्ज पर प्रत्येक आपरेशन सर्कल के एक 11 केवी फीडर को पायलट परियोजना में शामिल करेगा। बिजली निगमों के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक देवेन्द्र सिंह ने पंजाब माडल की प्रस्तुति देखने उपरांत उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के पीएसईबी अभियंताओं और वरिष्ठ अभियंताओं के साथ इस मुद्दे पर बातचीत करने के बाद दी।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में इस प्रणाली की पूरी जानकारी के लिए एक कोर कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट पं्रबधन को सौंपेगी। रिपोर्ट को निगमों के निदेशकों को उनके विचार के लिए भी सौंपा जाएगा।
उन्होंने कहा कि निगमों द्वारा राज्य में पहले ही प्रणाली सुद्ृढीकरण कार्यक्रम लागू किया गया है। इस माडल के तहत इच्छुक गांवों को शहरों की तर्ज पर बिजली मुहैया करवाई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे ऐसे गांवों की पहचान करें जहां पर पिछले 18 महीनों तक के बिल लेने लंबित हों। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली की सहायता से बिजली आपूर्ति में कम रूकावट, वोल्टेज में बढोतरी, ओवरलोडिंग की समस्या में कमी, उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति के संबंध में शिकायतें और दुर्घटनाओं की संभावनाओं में कमी आई है।
उत्तरी भारत बिजली इंजीनियर फेडरेशन के महासचिव भूपेन्द्र सिंह ने इस मॉडल की प्रस्तुति दी तथा कम लागत के इस मॉडल के मुख्य बिन्दुओं के बारे में बताया। भूपेन्द्र सिंह ने बताया कि इस मॉडल में सुधार के लिए किए गए निवेश को इसके लागू होने के डेढ साल के अंदर वसूली की जा सकती है। इससे वितरण ट्रांसफार्मरों की खराबी दर में भी महत्वपूर्ण कमी आएगी।
उन्होंने बताया कि इस मॉडल को पायलट परियोजना के लिए वेस्ट डिवीजन पटियाला के चार फीडरों पर शुरू किया गया था। सही और प्रामाणिक एनर्जी ऑडिट के लिए पूरे स्वतंत्र फीडरों का चयन किया गया था। पायलट परियोजना में दो ग्रामीण फीडर, एक शहरी कुंडी** क्षेत्र फीडर व एक फीडर शहर की पॉश कालोनी का था। निम्न दबाव वितरण प्रणाली को फिर से लागू किया गया तथा मीटरों को पिलर बक्सों में लगाया गया। पायलट परियोजना के पूरा होने पर पंजाब राज्य वितरण निगमों के बोर्ड प्रबन्धन द्वारा इसके परिणामों को अपनाया गया तथा ग्रामीण बिजली निगमों की निधि की सहायता से इसे पूरे प्रदेश में बढ़ाया गया। उन्होंने बताया कि लगभग 20 लाख उपभोक्ताओं के मीटरों को पिलर बक्सों में स्थापित किया जा चुका है तथा बाकि मीटरों का स्थापित किया जा रहा है।
बैठक में ये विचार-विमर्श किया गया कि इस मॉडल के तहत आपूर्ति के निम्न दबाव भाग को कम किया जाए, खुली तारों की जगह इन्सुलेटिड केबलें लगाई जाए, मीटरों को घरों से बाहर पिलरों में स्थापित किया जाए तथा उचित एनर्जी ऑडिट व प्रतिष्ठानों का अनुक्रमण सुनिश्चित किया जाए। मॉडल के और तकनीकी सुधारों के लिए इसे प्रदेश के वरिष्ठ बिजली अभियंताओं के स्तर पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।