चंडीगढ़ - हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर द्वारा मंगलवार को मंत्रीमंडल की बैठक में पंचायत प्रतिनिधियों के संबंध में लिए गए फैसलों से राज्य के विपक्षी दल कांग्रेस व इनेलो सकते में हैं। सरकार ने पंचायती राज अधिनियम 1994 में संशोधन करके न केवल दूरदर्शिता का प्रमाण दिया है बल्कि युवा एवं पढ़े-लिखे तबके के लोगों को पंचायती राज संस्थाओं की कमान संभालने के लिए भी प्रेरित कर दिया है। सरकार के इस संशोधन के निर्णय के पीछे न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाने का प्रयास किया गया है बल्कि प्रदेश की कई बड़ी ज्वलंत समस्याओं को भी नकेल डालने का प्रयास किया है।
पंचायत चुनाव लडऩे के लिए पुरूषों की शैक्षणिक योग्यता जहां दसवीं किए जाने से पंचायत विभाग के सचिव तथा अन्य अधिकारी अब उन्हें गुमराह नहीं कर सकेंगे। योग्यता तय करने वाला संशोधन कांग्रेस व इनेलो के साथ-साथ किसी भी राजनीति दल को नहीं भा रहा है। हरियाणा में लंबे समय से पंचायती राज प्रतिनिधियों द्वारा बिजली के बिलों की अदायगी न करने तथा सहकारी बैंकों से कर्ज लेकर वापस न करने की समस्या चल रही थी। गावों के लोग पंचायत प्रतिनिधियों की शह मिलने के कारण ही न तो बिलों की अदायगी करते थे और न ही कर्ज लौटाते थे। अब सरकार ने इसका भी तोड़ निकाल लिया है। अब वही व्यक्ति चुनाव लड़ सकेगा जिसकी तरफ न तो सहकारी बैंकों का कर्ज बकाया होगा और न ही बिजली का बिल बकाया होगा। इन दो संशोधनों को लागू करके प्रदेश सरकार आम जन में पंचायती राज प्रतिनिधियों को रोल मॉडल के रूप में पेश करना चाहती है।