शिमला - पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने आज एक नया राजनीतिक पैंतरा खेलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से खुद ही अपनी सम्पत्ति की सीबीआई या सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश से जांच कराए जाने की मांग कर डाली। इतना ही नहीं धूमल ने अपने साथ-साथ मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की सम्पत्तियों की जांच कराए जाने की मांग करके इस मामले को एक नया मोड़ दे दिया।
धूमल ने यह मांग ऐसे समय पर की है जब हिमाचल सरकार उनकी सम्पत्ति की जांच सीबीआई से कराए जाने की बात कर रही है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह यहां तक कह चुके हैं कि राज्य विजिलेंस ने धूमल व उनके परिवार की सम्पत्तियों की जानकारी एकत्र कर ली है और वे इसे सार्वजनिक करने वाले हैं। लेकिन इससे पहले कि मुख्यमंत्री इस जानकारी को सार्वजनिक करते धूमल ने खुद ही आज इस संबंध में जांच कराए जाने की मांग कर दी। धूमल ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में सम्पत्ति का वो ब्योरा भी दिया है, जो राज्य विजिलेंस ने तैयार किया है। धूमल के अनुसार इसी तरह के ब्योरे के आधार पर एक बार पहले भी उनके खिलाफ एक पूर्व पुलिस अधिकारी ने लोकायुक्त में शिकायत की थी, लेकिन बाद में ये साबित नहीं हो पाई।
धूमल ने कहा कि सम्पत्तियों के इसी ब्योरे को लेकर उनके खिलाफ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पहले भी आरोप लगा चुके हैं जिसे लेकर वे संबंधित नेताओं पर मानहानि का मुकदमा भी दायर कर चुके हैं। इस मुकदमे की वजह से पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरेंद्र सिंह को तो माफी भी मांगनी पड़ी है। धूमल ने अपने पत्र में लिखा है-हिमाचल में अब तक कुल पांच मुख्यमंत्री रहे हैं। इनमें से तीन अभी जीवित हैं। मेरी मांग है कि मेरे साथ-साथ मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के परिवार के सम्पत्तियों की भी जांच कर ली जाए ताकि यह पता लगाया जा सके कि मुख्यमंत्री बनने से पहले तीनों के पास पहले कितनी सम्पत्ति थी और मुख्यमंत्री बनने के बाद कितनी हो गई। धूमल ने अप्रत्यक्ष तौर पर शांता कुमार पर प्रहार करते हुए यह भी कहा कि कुछ लोग अपनी ईमानदारी का ढिंढोरा पीटते रहते हैं और कुछ को उनकी खामोशी की सजा मिलती है। धूमल ने प्रधानमंत्री से कहा है कि अगर उनकी सम्पत्ति उनके द्वारा घोषित सम्पत्ति से अधिक निकलती है तो सरकार इसे जब्त कर सकती है।