कुल्लू - पार्वती नदी के उफनते पानी में खोज अभियान को चलाए जाने में आ रही दिक्कतों के बाद भारतीय नौसेना और एनडीआरएफ की टीम ने आज बस दुर्घटना में मारे गए व्यक्तियों के शवों के काम को लारजी बांध क्षेत्र में ही दो-तीन दिनों तक केंद्रित करने का फैसला लिया। अभियान के पहले चरण में नौसेना को आज उस समय आंशिक सफलता भी मिली जब उसके गोताखोरों ने बांध क्षेत्र में एक बच्चे के शव को खोज लिया।
नौसेना द्वारा विशाखापत्तनम से मंगाए गए विशेष उपकरणों की मदद से किए जा रहे इस खोज अभियान में आज बांध के जलाशय वाले क्षेत्र में काफी कबाड़ के जमा होने का पता भी चला। सोनार उपकरण के लेजर किरणों के जरिए बनी तस्वीरों से बांध क्षेत्र के कई हिस्सों में लोह और टीन जैसी धातुओं वाला यह कबाड़ पिछले कई सालों का है। गोताखोरों को उफनते पानी में भेजना खतरे से खाली नहीं है। भारतीय नौसेना के गोताखोरों को समुद्र की गहराइयों में खोज अभियानों को चलाए जाने का तो अच्छा खासा अनुभव है लेकिन तेज प्रवाह वाले नदी नालों में गोताखोरी करना इनके लिए भी मुमकिन नहीं है। यही स्थिति एनडीआरएफ के जवानों की भी है।
ऐसे में बस की खोज के लिए नदी के जलस्तर के कम होने का इंतजार करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। बीच-बीच में हिट एंड ट्रायल के तरीके को अपनाकर रस्सी से जुड़े हुक आदि डालकर नदी में बस को खोजने के प्रयास जरूर किए जा रहे हैं। कुल्लू के जिला उपायुक्त राकेश कंवर का कहना है कि दुर्घटना का शिकार हुए व्यक्तियों के शव क्योंकि अंतत: बहकर बांध क्षेत्र में ही पहुंचेंगे इसलिए शुरुआती चरण में खोज अभियान को यहीं केंद्रित करने का फैसला लिया गया है। लगभग 600 लोगों की मदद से खोज अभियान को लगातार चलाया जा रहा है।