शिमला - हिमाचल प्रदेश की राजधानी एवं पहाड़ों की रानी और प्रदेश के सबसे बड़े शहर शिमला को केंद्र सरकार खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट स्मार्ट सीटी परियोजना से बाहर कर दिया गया है। हिमाचल प्रदेश से इस प्रोजेक्ट में धर्मशाला का चयन हुआ है। प्रदेश सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश से तीन शहरों शिमला, धर्मशाला और सुंदरनगर को प्रस्तावित किया था। प्रदेश के इन तीनों शहरों की मौजूदा स्थिति के मद्देनजर राजधानी शिमला का स्मार्ट सिटी परियोजना में चुना जाना तय माना जा रहा था, लेकिन अंत समय में शिमला को नजरअंदाज कर धर्मशाला को इस प्रोजेक्ट में चुन लिया गया है।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से शिमला के बाहर होने और धर्मशाला के चयन के साथ ही केंद्र सरकार द्वारा इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश से धर्मशाला शहर के चयन पर उंगलियां भी उठनी आरंभ हो गई हैं। इस बीच स्मार्ट सीटी प्रोजेक्ट से शिमला के बाहर होने को लेकर प्रदेश सरकार संदेह के घेरे में आ गई है। नगर निगम शिमला के उपमहापौर टिकेंद्र पंवर ने आज केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडू को पत्र लिखकर न केवल उन्हें खरी-खरी सुनाई बल्कि प्रदेश सरकार पर भी शिमला और धर्मशाला को लेकर तुलनात्मक आंकड़ों में फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया। उपमहापौर ने नायडू को लिखे पत्र में इस प्रोजेक्ट के तहत शिमला का चयन न होने के लिए सबसे बड़ा धोखा और हेराफेरी करार दिया है।
नायडू को लिखे पत्र में उपमहापौर ने नगर निगम की ओर से मांग की है कि वह इस प्रोजेक्ट के तहत शहरों के निष्पक्ष और मापदंडों के तहत चयन का राग अलापना तुरंत बंद करे। साथ ही केंद्र की ओर से एक टीम भेजकर निर्धारित मापदंडों का स्वयं जायजा ले और फिर स्मार्ट सिटी में प्रदेश से किसी एक शहर के चयन का फैसला ले। उपमहापौर ने ये भी स्पष्ट किया है कि धर्मशाला के चयन को लेकर उनका विरोध नहीं है लेकिन यदि मापदंडों के आधार पर चयन होना है तो फिर ये निष्पक्ष होना चाहिए अन्यथा इस प्रोजेक्ट के तहत शहरों के चयन का काम संबंधित प्रदेश सरकारों पर छोड़ देना चाहिए।