मंडी - प्रदेश में लगभग 12 लाख लोग निरक्षर हैं, जिन्हें साक्षर किए बिना प्रदेश की साक्षरता दर में सुधार संभव नहीं। यह खुलासा राज्य संसाधन केंद्र शिमला के निदेशक डा. ओपी भूरेटा ने मंडी में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में किया। उन्होंने साक्षरता के क्षेत्र में चंबा जिला में चलाए जा रहे कार्यक्रम का जिक्र करते हुए प्रदेश की स्थिति को रेखांकित किया। ज्ञान विज्ञान समिति मंडी के जिलाध्यक्ष राजेंद्र मोहन ने साक्षरता के मुद्दे के साथ पूरे देश में राष्ट्रीय साक्षरता मिशन को एक अद्भुत शुरुआत के रूप में परिभाषित किया।
उन्होंने मंडी का उदाहरण पेश करते हुए कहा कि ज्ञान विज्ञान समिति की शुरुआत ही समाज में मिशन को कामयाब करने, स्वयंसेवी भावना पैदा करते हुए समाज में बदलाव के लिए एक वातावरण तैयार करना था, इसलिए मंडी में साक्षरता समिति की बनावट इसका उदाहरण है। भारत ज्ञान विज्ञान समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. सी. रामाकृष्णन ने शिक्षा के क्षेत्र में देश के सम्मुख चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए औपचारिक शिक्षा तक आम जनता की पहुंच, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, जीवनचर्या एवं आजीविका से जुड़ी शिक्षा के महत्त्व पर चर्चा की। साथ ही मौजूदा दौर में शिक्षा में निजी क्षेत्र की घुसपैठ के खतरों को भी रेखांकित किया।
उपाध्यक्ष आशा मिश्रा ने ‘शिक्षा के अधिकार अधिनियम’ के प्रभावी क्रियान्वयन की समस्याओं तथा चुनौतियों पर चर्चा की। राष्ट्रीय महासचिव डा. काशीनाथ चटर्जी ने बीजीवीएस के साक्षरता को आंदोलन बनाने की भूमिका में राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक सहयोग एवं स्वयंसेवी भावना के मिश्रण को रेखांकित किया राज्य संसाधन केंद्र रोहतक के पूर्व निदेशक डा. प्रमोद गौरी व मंडी साक्षरता एवं जन विकास समिति के परियोजना समन्वयक ललित शर्मा और जोगिंद्र वालिया ने भी इस अवसर पर अपनी बात रखी।