शिमला - हिमाचल में सीएनजी बसों का ट्रायल सफल रहा है। अब प्रदेश सरकार इसका आधारभूत ढांचा स्थापित करने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से 250 करोड़ रुपए की फंडिंग के लिए आग्रह करेगी। मसलन एनजीटी आदेश दे कि कोई केंद्रीय एजेंसी इस बारे में प्रदेश की सहायता करे। परिवहन मंत्री जीएस बाली ने शुक्रवार को पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में कहा कि सीएनजी बसों को सफल बनाने के लिए स्थानीय टैक्सी आपरेटरों को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
इसके लिए उनकी एक सोसायटी का गठन किया जा सकता है, ताकि वह ऐसी बसों को रोहतांग से मनाली तक आवाजाही के लिए सफलतापूर्वक चला सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सीएनजी बसें रोहतांग के विषम वातावरण में सफलतापूर्वक चल सकें, लिहाजा टाटा से भी आग्रह किया जाएगा कि वह इस दिशा में रिसर्च करे कि संबंधित सीएनजी बसों को आवाजाही के दौरान कोई दिक्कत पेश न आए। अभी तक टाटा ही ऐसी छोटी सीएनजी बसें तैयार कर रहा है, जो कुछ प्रदेशों में चल भी रही हैं। हालांकि कुछ और कंपनियां भी हैं, मगर टाटा की बसें ज्यादा संख्या में बताई जाती हैं।
मनाली में सीएनजी के लिए गैस स्टेशन स्थापित करने के लिए भी प्रयास शुरू किए जा रहे हैं। इससे जुड़े और साजो-सामान को तभी मुहैया करवाया जा सकता है, यदि कोई केंद्रीय एजेंसी इसकी फंडिंग के लिए तैयार हो सके। अभी तैयार की गई विशेषज्ञ रिपोर्ट के मुताबिक यदि ऐसी 60 बसें रोहतांग से मनाली के बीच चलती हैं तो पर्यटकों व स्थानीय लोगों की आवश्कताएं पूरी हो सकती हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रोहतांग से मनाली तक नियंत्रित वाहन चलाने को लेकर आदेश दे रखे हैं, मगर आदेशों की सख्ती से अनुपालना नहीं हो पा रही है। छह हफ्ते में एनजीटी ने इसी संदर्भ में सरकार से जवाब भी प्रस्तुत करने के आदेश दे रखे हैं। इसमें अतिरिक्त मुख्य सचिव वन व ट्रांसपोर्ट के साथ मुख्य सचिव पर भी टिप्पणियां की गई हैं।