सोलन - हिमाचल प्रदेश का पहला एरोनॉटिकल कालेज सोलन में खुल गया है। शहर के साथ लगते आंजी क्षेत्र में कॉलेज ऑफ एयरक्राफ्ट इंजीनियरिंग में प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस कालेज के खुलने के बाद प्रदेश के छात्रों को एरोनॉटिकल में इंजीनियरिंग करने के लिए बाहरी राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा। इस कालेज को भारत सरकार नागरिक उड्डयन महानिदेशक डीजीसीए द्वारा मान्यता प्रदान की गई है। पहले शैक्षणिक सत्र में 60 सीटें आबंटित की गई हैं।
संस्थान द्वारा एयरक्राफ्ट मैंटीनेंस इंजीनियरिंग में तीन वर्ष का डिप्लोमा करवाया जा रहा है। जबकि अंतिम छह महीनों में विभिन्न एयरलाइंस, मैटिनेंस कंपनियों फील्ड ट्रेनिंग भी करवाई जा रही है। इसी दौरान छात्र को उनके ज्ञान व गुण विशेषता को परख कर विभिन्न एयरलाइंस द्वारा चयनित कर भी किया जाएगा। देश में बढ़ती एरोनॉटिकल इंजीनियरों की डिमांड के चलते अच्छे वेतन पर नौकरी मिलना काफी आसान है। हिमाचल कालेज ऑफ एयरक्राफ्ट इंजीनियरिंग द्वारा अब तक देश की कई जानी-मानी कंपनियों के साथ एमओयू भी साईन किया जा चुका है, जबकि कई कंपनियों से बात चल रही है। जो अभिभावक अपने बच्चों के लिए बेहतरीन भविष्य की तलाश में वह यहां पर प्रवेश ले सकते हैं।
संस्थान में प्रवेश लेने के लिए दस जमा दो की परीक्षा भौतिक, रसायन विज्ञान व गणित के साथ उत्तीर्ण होनी जरूरी है। प्रवेश के दौरान छात्रों की तर्क, बुद्धि, विश्लेषण क्षमता की परख भी की जाएगी। हिमाचल कॉलेज ऑफ एयरक्राफ्ट इंजीनियरिंग में अनुभवी शिक्षक वर्ग को तैनात किया गया है जो विद्यार्थियों को सैद्धांतिक व तकनिकी प्रशिक्षण देंगे, ताकि विमानन एयरलाइंस इंडस्ट्री के लिए बेहतरीन आत्म विश्वासी व मेधावी इंजीनियर बनाए जा सकें। कालेज द्वारा छात्रों को मुफ्त पर्सनल ग्रूमिंग, कम्प्यूटर व इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स भी करवाया जा रहा है। इस प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सरकारी क्षेत्र में भी नौकरी की अपार संभावनाएं हैं। एयर इंडिया, इंडियन एयरलाइंस, पवन हंस, सीमा सुरक्षा बल एयर विंग, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी, राज्य सरकार के विमानन विभाग में एरोनॉटिकल इंजीनियर को नौकरी के अवसर प्रदान किए जाते हैं।