कैथल - राष्ट्रीय राजमार्ग 65 के लिए किसानों की अधिग्रहण की गई जमीन के मामले को लेकर चलाया गया अनिश्चितकालीन धरना गुरुवार को अनिश्चितकालीन जाम में बदल दिया गया। जाम लगाने से पूर्व कई नेताओं ने अपने विचार रखे। अनिश्चितकालीन जाम की सूचना पाकर जिला प्रशासन के द्वारा अपने अधिकारी भी भेजे गए, परंतु कोशिश विफल रही। इतना ही नहीं जिला पुलिस की लापरवाही भी देखने को मिली, जिससे दिन भर यात्री को परेशानी का सामना करना पड़ा और अपने वाहन नजदीकी गांवों से निकालने पड़े। जाम का दोषी कैथल के उपायुक्त को ठहराया गया।
राष्ट्रीय राजमार्ग 65 के लिए किसानों की अधिग्रहण की गई जमीन के कम भाव को लेकर किसानों द्वारा 21 जुलाई से धरना दिया जा रहा है। उसी दिन कैथल के उपायुक्त को इस मामले में एक ज्ञापन भी दिया गया था। उपायुक्त को इस बारे में आज तक का समय दिया गया था। जब उपायुक्त की ओर से कोई जवाब नहीं आया तो सुबह किसानों की एक बैठक हुई। बैठक में कहा गया कि जिला प्रशासन किसानों को कमजोर समझ रहा है, परंतु किसान कमजोर नहीं है। उसके बाद किसान यूनियन के प्रधान गुरनाम चढुनी, कर्मवीर सेगा, भूरा राम पबनावा, सुरेश कोथ, कांग्रेसी नेता रणवीर मान उर्फ बोबी मान, पूर्व संसदीय सचिव रामपाल माजरा, किसान नेता धर्मपाल छोत, महिला नेता संतरों देवी आदि ने भी जनसभा को संबोधित किया गया और इस मामले के अलावा अन्य मामले को लेकर भी भाजपा कि प्रदेश व केंद्र सरकार की धज्जियां उड़ाई गई।
सभी नेताओं ने इस सरकार को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि इनको राज चलाना नहीं आता। उसके बाद लगभग 12 बजे अनिश्चित कालीन जाम लगाने का निर्णय लेने पा तीतरम मोड़ पर जाम लगा दिया गया। मोड़ पर कैथल रोड, हिसार रोड़ व जींद रोड़ को ट्रैक्टर ट्रालियों को खड़ा करके जाम लगाया। जाम में महिलाओं ने भी डट कर भाग लिया। जाम की सूचना बुधवार को ही मिल गई थी, परंतु इसके बाद भी जिला पुलिस के द्वारा कोई ठोस उपाय नहीं किए गए।