चण्डीगढ़, 26 फरवरी - हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने आज कहा कि राज्य के सभी पुलिस थानों में महिलाओं व बच्चों की शिकायतों के निवारण हेतू अलग से विशेष डैस्क बनाये जाने के अतिरिक्त महिलाओं की मदद के लिये सभी जिलों में महिला हैल्प लाइन संख्या-1091 शुरू की गई है।
मुख्यमंत्री आज यहां हरियाणा विधानसभा के चल रहे बजट सत्र के दौरान विधायक सम्पत सिंह, श्रीमती सुमिता सिंह, भारतभूषण बत्तरा और रामपाल माजरा द्वारा लाये गये ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार राज्य में महिलाआं की सुरक्षा पर पूरा ध्यान देने के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा के प्रति भी वचनबद्घ है। राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति शांतिपूर्ण एवं नियंत्रण में है तथा साम्प्रदायिक सद्भाव एवं शांति का माहौल है। राज्य पुलसि द्वारा किये गये निरंतर, सुसंगत एवं समन्वित प्रयासों के फलस्वरूप वर्ष 2012 के दौरान राज्यभर में भारतीय दण्ड संहिता के तहत अपराध लगभग नियंत्रण में हैं और बलात्कार की घटनायें गत वर्ष की तुलना में कम हुई हैं।
राज्य स्तर पर केवल महिलाओं के विरूद्घ अपराधों की निगरानी, शीघ्र जांच एवं ट्रायल हेतू राज्य पुलिस मुख्यालय पर एक अतिरिक्त पुलिस महानिरीक्षक और एक महिला पुलिस महानिरीक्षक तैनात किये गये हैं। महिलाओं के विरूद्घ होने वालों अपराधों के पर्यवेक्षण के लिये प्रत्येक जिले में एक महिला उप-पुलिस अधीक्षक/निरीक्षक रैंक के पद की महिला अधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप में तैनात किया गया है। महिलाओं की शिकायतों तथा उनके विरूद्घ अपराधों में त्वरित रिस्पोंस के लिये समस्त राज्य में महिला हैल्प लाइन नं0 1091 की व्यवस्था की गई है। इस महिला हैल्प लाइन पर शिकायतें सुनने के लिये विशेष तौर से प्रशिक्षित महिला पुलिस कर्मियों की ही नियुक्ति की गई है। उच्च एवं मध्यम वर्ग के वरिष्ठ अधिकारी इस हैल्प लाइन पर मिलने वाले शिकायतों पर तुरंत कार्यवाही एवं उनका निवारण करने के साथ-साथ इसकी कार्यप्रणाली पर नजर भी रखते हैं।
महिलाओं के विरूद्घ होने वाले अपराधों से संबंधित मामलों के शीघ्र निपटान के लिये 21 फास्ट ट्रेक अदालतें स्थापित की जा रही हैं। महिलाओं के विरूद्घ अपराधों को रोकने तथा उत्पीडि़त महिला की तुरंत मदद करने के लिये प्रत्येक जिले में कम से एक महिला पीसीआर वैन तैनात की गई है। गुड़गांव, फरीदाबाद जैसे बड़े शहरों में क्रमशः पांच एवं तीन महिला पीसीआर वैन तैनात की गई हैं। राज्य में ऐसी 30 पीसीआर वैन कार्यरत हैं, जो न केवल पीडि़त महिला की मदद करती हैं बल्कि आवश्यकता होने पर उन्हें तुरंत डाक्टरी सुविधा भी उपलब्ध करवाती हैं। ये वैनस सभी संवेदनशील स्थलों की निरन्तर पैट्रोलिंग करती रहती हैं।
हरियाणा राज्य विधिक सेवाएं प्राधिकरण ने राज्य की सभी उत्पीडि़त महिलाओं एवं बच्चों को कानूनी सहायता उपलब्ध करवाने के लिये उन्हें कानूनी सलाहकार देने की एक योजना बनाई है, जिसके तहत न्यायिक सचिवों द्वारा महिला वकीलों की प्रतिनियुक्ति करने को कहा गया है। सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिये गये हैं कि वे यौन उत्पीड़न से संबंधित एकत्रित किये गये नमूनों की वैज्ञानिक जांच हरियाणा मैडिको लीगल मैन्यूल-2012 के अनुसार ही करें ताकि जांच से जुड़े सभी साक्ष्यों की गुणवत्ता बढ़े और आरोपियों की सजा दर में भी बढ़ोतरी हो तथा अपराधों पर प्रभावी रोक लग सके।
महिलाओं के विरूद्घ अपराधों की निरंतर रूप से समीक्षा करने के लिये जिला स्तर पर जिला मैजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक एवं जिला न्यायवादी को लेकर जिला स्तरीय कमेटियां गठित की गई हैं। इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय पुलिस को भेद्यता मानचित्रण तैयार करने के लिये लड़कियों के स्कूलों एवं कॉलेजों, कमज़ोर वर्गों के क्षेत्रों, मलिन बस्तियों आदि में लगातार गश्त करने और यहां स्वयं सहायता समूह गठित करने के निर्देश दिये गये हैं। यौन अपराधियों की पहचान करने और उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिये सभी निवारक उपाय करने, अकेली कामकाजी महिलाएं, बच्चे एवं नौकरानियां जो उच्च जोखिम वाले समूह हैं, बारे लोगों को संवेदशील बनाने और अपराधियों में डर बैठाने के लिये एक जागरूकता अभियान चलाने, खेल विभाग के सहयोग से सभी महिला शिक्षण संस्थानों में लड़कियों और महिलाओं को आत्मसुरक्षा के उपाय सिखाने के लिये विशेष शिविर आयोजित करने, महिला एवं बाल विकास विभाग जैसे अन्य विभागों के सहयोग से पीडि़तों को पुनर्स्थापित करने की योजनाओं पर अमल करने, पीडि़त महिला के साथ संवेदनशीलता बरतने, महिलाओं के विरूद्घ होने वाले अपराधों से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में दिन रात गश्त लगाने तथा आपराधिक प्रवृति के लोगों को पकड़ने के लिये उपयुक्त स्थलों पर नाकाबंदी करने को कहा गया है।