शिमला - हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने धर्मशाला में बरामद की गई अवैध विदेशी करेंसी के बहुचर्चित मामले में तिब्बतियों के दूसरे सबसे बड़े धर्मगुरु उग्येन त्रिनले दोरजे करमापा को अभियुक्त बनाकर उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने के आदेश दिए हैं। वर्ष 2011 में पुलिस की छापामारी के दौरान करमा गारचेन ट्रस्ट के सिद्धबाड़ी स्थित ग्यातो गोम्पा से बरामद की गई करेंसी के मामले में पुलिस ने 10 लोगों को अभियुक्त बनाया था। इसके बाद 4 साल पहले उन्हें अभियुक्तों की सूची से बाहर कर दिया गया था। करमापा को सूची से बाहर करने की सिफारिश हिमाचल सरकार ने कोर्ट में याचिका दायर कर की थी।
यह आदेश ऊना कोर्ट ने 21 मई 2012 को दिया था। बुधवार को हिमाचल हाईकोर्ट ने इस आदेश को पलटते हुये करमापा की भूमिका को लेकर कड़ी टिप्पणियां की हैं। कोर्ट के अनुसार उन्हें सिर्फ इसलिए अभियुक्तों की लिस्ट से नहीं हटाया जाना चाहिये कि वे एक धर्मगुरु हैं और उनके अनुयायियों की संख्या काफी ज्यादा है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि भले ही उनका इस मामले में प्रत्यक्ष तौर पर कोई हाथ नहीं है। लेकिन करमा गारचेन ट्रस्ट द्वारा खरीदी जा रही 5 करोड़ रुपए की जमीन का मामला हो या ऊना के मैहतपुर बैरियर पर पकड़े गए एक करोड़ रुपए का। इस सारे षडय़ंत्र में करमापा को जानकारी होने से इनकार नहीं किया जा सकता। उनपर धारा 120बी के तहत मामला चलाया जाना चाहिए।