शिमला - प्रियंका गांधी की जमीन का ब्यौरा सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध न करवाए जाने पर हिमाचल प्रदेश सूचना आयोग ने सरकार की खिंचाई की है। आयोग ने शिमला के एडीएम को 10 दिनों के भीतर यह ब्यौरा उपलब्ध करवाने का आदेश दिया है। आयोग ने कहा कि प्रियंका की सुरक्षा को खतरा बताते हुए यह जानकारी उपलब्ध न करवाना जायज नहीं है। आयोग ने कहा, ‘प्रियंका गांधी को मिली एसपीजी की सुरक्षा का उनकी जमीन के मामले से कोई ताल्लुक नहीं हो सकता।
एसपीजी सुरक्षा प्रियंका को मिली है न कि उनकी जमीन को।’ आयोग ने शिमला के डीसी और एडीएम के साथ-साथ तहसीलदार, जो इस मामले में सूचना अधिकारी हैं, को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर जवाब देने के लिए भी कहा है। आयोग का कहा है कि सूचना उपलब्ध करवाए जाने में हुई देरी के लिए क्यों न अधिकारियों पर पैनल्टी लगाई जाये। आयोग ने अगली सुनवाई के लिए 23 जुलाई की तारीख तय की है। प्रियंका की तरफ से दिल्ली के एस. रामकृष्णनन ने आयोग के सामने दलील दी कि प्रियंका जैसी शख्सियतों से जुड़ी जानकारियां निजता और सुरक्षा संबंधी कानूनी अधिकारों के चलते सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार का भी यही मानना है कि प्रियंका के शिमला में बन रहे घर से जुड़ी जानकारियां देने से उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। उनके मुताबिक एसपीजी ने भी जानकारियां उपलब्ध करवाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। शिमला के जिला उपायुक्त ने बीती 27 जनवरी को अपने फैसले में यही स्टैंड लेते हुए कहा था कि प्रियंका गांधी की जमीन से जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक करना उचित नहीं। इस आदेश के खिलाफ देवाशीष ने सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग ने कहा है जब सांसद, विधायक और मंत्री अपनी संपत्ति घोषित करते समय अपनी जमीनों की जानकारी सार्वजनिक कर सकते हैं, तो सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी देने में क्या हर्ज है।