चंडीगढ़ - राजधानी चंडीगढ़ को लेकर हरियाणा व पंजाब के बीच छिड़े विवाद के चलते हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने प्रदेश के राज्यपाल ने एनसीआर की तर्ज पर चंडीगढ़ ट्राईसिटी के संयुक्त विकास का अलग से प्लानिंग बोर्ड तैयार करने की मांग उठाई है। विज ने मंगलवार को इस मामले को लेकर टवीट् करके नए विवाद को जन्म दे दिया है। चंडीगढ़ पर अधिकार को लेकर हरियाणा व पंजाब में लंबे समय से राजनीतिक विवाद चल रहा है। इस विवाद के बीच हरियाणा सरकार पंचकूला तथा पंजाब सरकार मोहाली को मिनी राजधानी के रूप में विकसित कर रही है।
हरियाणा के अधिकतर सरकारी कार्यालय जहां पंचकूला में स्थानांत्रित हो चुके हैं वहीं पंजाब के अधिकतर सरकारी कार्यालय इस समय मोहाली में स्थानांत्रित हो चुके हैं। इसके बावजूद दोनों राज्यों द्वारा चंडीगढ़ पर अधिकार को छोड़ा नहीं जा रहा है। इस विवाद बीच हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने नया मुद्दा छेड़ दिया है। विज ने सुझाव दिया है कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास की तरह चंडीगढ़-मोहाली-पंचकूला को जोडक़र बनाए गए ट्राईसिटी के विकास के लिए भी अलग से बॉडी का गठन किया जाए। यह तभी संभव होगा जब हरियाणा के राज्यपाल इस मामले में पहलकदमी करेंगे।
विज के टवीट् के कई मायने निकल रहे हैं। हरियाणा के राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी के पास पिछले कुछ महीने से पंजाब का भी अतिरिक्त कार्यभार है। नियमानुसार पंजाब के राज्यपाल के पास चंडीगढ़ के प्रशासक की जिम्मेदारी भी होती है। जिसके चलते सोलंकी के पास इस समय तीनों चार्ज हैं। ऐसे में अगर सोलंकी इस तरह का कोई निर्णय लेते हैं तो इससे दोनों राज्यों की राजनीति सीधे तौर पर प्रभावित होगी।
अगर ट्राईसिटी प्लानिंग बोर्ड का गठन होता है तो उसके अधीन चंडीगढ़ के अलावा मोहाली, खरड़, कुराली, मोरिंडा, जीरकपुर, डेराबस्सी, लालडू होंगे तो दूसरी तरफ पंचकूला के अंतर्गत आने वाले रामगढ़, बरवाला, पिंजौर व कालका का क्षेत्र होगा। ऐसे में दोनों राज्यों का चंडीगढ़ पर दावा अपने-आप समाप्त हो जाएगा।