चंडीगढ़ - हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि हरियाणा के सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा प्राचीन परंपराओं को बनाए रखने के लिए पूरे राज्य के सभी खंडों में गीत, नाटक, कवि सम्मेलन आदि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। वह करनाल स्थित एनडीआरआई के सभागार में हरियाणा सांस्कृतिक कार्य विभाग एवं हरियाणा कला परिषद के सौजन्य से प्रथम अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित हास्य कवि सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सांस्कृतिक कार्य विभाग द्वारा ऐसी योजना तैयार की गई है, जिससे युवाओं को अपनी प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति से रू-ब-रू होने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत विभाग द्वारा खंड स्तर से लेकर राज्य स्तर तक विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि इन सांस्कृतिक कार्यक्रमों से युवाओं को सही दिशा मिलेगी। उन्होंने कवियों का स्वागत करते हुए कहा कि हास्य के माध्यम से वर्तमान भाग-दौड़ भरी जिंदगी के तनाव को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हास्य से जहां ऊर्जा प्राप्त होती है, वहीं इसमें संदेश एवं ज्ञान छिपा होता है।
उन्होंने जीवन में हास्य-व्यंग्य का महत्त्व बताते हुए कहा कि हास्य तभी तक सही रहता है जब तक वह उपहास ना बने। मुख्यमंत्री ने अपने जीवन से जुड़े हास्य विनोद के कई पहलुओं का जिक्र किया, जिस पर सभागार में खूब ठहाके लगे। सांस्कृतिक कार्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजय वर्धन ने कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का स्वागत किया। उन्होंने भी हरियाणा में अपनी सेवाकाल के दौरान हुए हास्य प्रसंगों का हाल सुनाते हुए एक शेर पढ़ा-जरा हंस ले मायूस क्यों खड़ा है, खुदा बहुत बड़ा है।
हास्य कवि सम्मेलन में कवि पद्मश्री सुरेंद्र शर्मा, पद्मश्री डा. सुनील जोगी, सरदार मनजीत सिंह, डा. अनु सपन डा. प्रवीन शुक्ला, पापुलर मेरठी, कलीम समर तथा मास्टर महेंद्र ने अपनी हास्य रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। डा. अनु ने मां सरस्वती की वंदना करने के अलावा कई मुक्तक पढ़े। उनके मुक्तक-देखो कितने सितार बजते हैं, दिल के सब तार-तार बजते हैं, जब से तुमने मुझे निहारा घुंघरू मुझ में हजार बजते हैं।