नई दिल्ली- हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनके परिजनों के खिलाफ गुरुवार को सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है। यह अदालत में जारी कार्रवाई से अलग है। मामले में एलआईसी और सेब के बागान से आमदनी आदि को शामिल किया गया है। फिलहाल सीबीआई ने मामले की प्राथमिक जांच शुरू कर दी है। कांग्रेस ने इसे बदले की कार्रवाई करार दिया है। यह मामला तब का है, जब वीरभद्र सिंह केंद्र सरकार में इस्पात मंत्री थे। 2009-11 के दौरान हिमाचल के ही बीमा एजेंट आनंद चौहान ने वीरभद्र सिंह और उनके परिजनों की एलआईसी की थी।
2010-11 और 2011-12 में उन्होंने जो आयकर रिटर्न दाखिल की थी और बाद में संशोधित रिटर्न दी थी, उसे आयकर विभाग ने आकलन करते वक्त खारिज कर दिया था। एजेंसियों का मानना है कि बागान से इतनी आमदनी नहीं हो सकती। वह मामला करीब तीन करोड़ का है। एजेंसियों ने जांच करते हुए कुल 6.10 करोड़ रुपए की आय से अधिक संपत्ति का आरोप लगाया है। सीबीआई ने फिलहाल प्राथमिक जांच का मामला दर्ज किया है, ताकि वीरभद्र सिंह से पूछताछ की जा सके। मामला वीरभद्र की पत्नी एवं पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह, बेटी अपराजिता, बेटे विक्रमादित्य और आनंद चौहान के खिलाफ दर्ज किया गया है।
हालांकि वीरभद्र सिंह के खिलाफ कथित भ्रष्टाचार का एक केस दिल्ली उच्च न्यायालय में जारी है। अदालत ने सीबीआई को कोई निर्देश नहीं दिया है कि इस आशय का मामला दर्ज किया जाए, लेकिन अदालत ने ऐसी प्राथमिक जांच न करने का भी कोई आदेश नहीं दिया है। सूत्र मानते हैं कि वित्त मंत्री अरुण जेटली के इशारों पर आयकर विभाग ने जांच की थी और अब मोदी सरकार कांग्रेस के कुछ बड़े नेताओं के जरिए पार्टी को सबक सिखाना चाहती है। शंकर सिंह वघेला के बाद वीरभद्र सिंह के खिलाफ मामले को नए सिरे से खोला गया है।
कांग्रेस ने इसे अधिकृत तौर पर बदले की भावना से की गई कार्रवाई करार दिया है। पार्टी महासचिव सीपी जोशी ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया है कि चूंकि कांग्रेस विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कारनामों पर मुखर होकर बोल रही है, लिहाजा मोदी सरकार सीबीआई का दुरुपयोग कर इन प्रकरणों से ध्यान बंटाना चाहती है, लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी और न ही संघर्ष को छोड़ेगी।