चंडीगढ़, 19 फरवरी - हरियाणा सरकार ने महिला यौनकर्मियों एवं यौन उत्पीडि़त महिलाओं के पुनर्वास के लिए योजना क्रियान्वित की है, जिसका उद्देश्य ऐसी महिलाओं को विभिन्न तकनीकी एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण देकर उनके लिए रोजगार के अवसर सृजित करना है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए हरियाणा महिला एवं बाल विकास विभाग की महानिदेशक श्रीमती सुमिता मिश्रा ने बताया कि इस योजना की लाभ पात्र महिलाओं का चयन सरकार की किसी एजेंसी द्वारा गैर सरकारी संगठनों, विशेषज्ञ निकायों तथा जनसांख्यिक द्वारा किया जायेगा।
इस योजना के उद्देश्य ऐसी महिलाओं का क्षमता निर्माण एवं कौशल विकास करना, उन्हें आत्म निर्भर बनाने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान की व्यवस्था करना, उन्हें महिला विकास निगम के माध्यम से या तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा चयनित किसी औद्योगिक प्रशिक्षण केन्द्र द्वारा तकनीकी एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदान करना, योजना के तहत प्रशिक्षित महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण जुटाने में सहयोग देना, हरियाणा महिला विकास निगम के माध्यम से ऋण पर छूट प्रदान करना तथा योजना के अंतर्गत विभाग के सहायता प्राप्त उद्यमियों के उत्पादों की बिक्री के लिए जिला शहरी विकास प्राधिकरण, जिला ग्रामीण विकास प्राधिकरण, जिला रैड क्रॉस सोसाइटी, जिला कल्याण बोर्ड, गैर सरकारी संगठनों, प्रशिक्षण संस्थानों इत्यादि के सहयोग से प्रदर्शनी या मेला का आयोजन करना शामिल है।
उन्होंने बताया कि इन महिलाओं का जरूरत के मुताबिक कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जायेगा, जिसके तहत एक महीने से एक वर्ष तक के विभिन्न 20 तरह के प्रशिक्षणों के लिए प्रति प्रशिक्षु 3000 रुपये प्रति माह की दर से वजीफा दिया जायेगा। इन प्रशिक्षणों में मसालों के विनिर्माण एवं पैकिंग, बुक बाइन्डिंग तथा नोट बुक विनिर्माण, कपड़ों की छपाई एवं रंगाई, मिठाई एवं खिलौने बनाना, सेनेटरी नैपकिंग बनाना, अतिथ्यि सत्कार तथा चॉक बनाने का एक महीने का प्रशिक्षण, कपड़ों के बैग, बैकिंग, फुटवियर विनिर्माण तथा जेरीएट्रिक नर्सिंग एवं हाउस किपिंग का तीन महीने का प्रशिक्षण, कंप्यूटर का तीन से छह महीने का प्रशिक्षण, डॉयग्नोस्टिक लैब, जैम, जैली एवं अचार विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, बाल एवं त्वचा देखभाल तथा डे्रस डिजाइनिंग एवं मेकिंग का छह महीने का प्रशिक्षण चमड़े के उत्पादों बनाने का छह महीने से एक वर्ष का प्रशिक्षण तथा स्टैनोग्राफी एवं डाटा एंट्री का एक वर्ष का प्रशिक्षण शामिल हैं।
प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षु को कच्चा माल, वजीफा एवं अन्य खर्च इत्यादि को महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा महिला विकास निगम के माध्यम से वहन किया जायेगा। इसके अलावा, विभाग विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भी शत प्रतिशत खर्च का वहन करेगा।
योजना के तहत स्वरोजगार शुरू करने वाली महिलाओं को राष्ट्रीयकृत बैंकों के माध्यम से ऋण की व्यवस्था भी की जायेगी और ऐसे ऋण पर निगम अधिकतम 10,000 रुपये की सीमा तक 5 प्रतिशत सबसिडी देगा।