शिमला 19 फरवरी — घाटे की मार झेल रहे हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम ने खुद को घाटे से उबारने के लिए कोशिश शुरू कर दी है। टारगेट की हर महीने समीक्षा कर पुअर परफार्मेंस निकाला जायेगा। टारगेट पूरा न होने में किसी प्रकार की अनदेखी को स्वीकार नहीं किया जायेगा।
अधिकारी घाटे के रूट व खटारा बसों का तर्क देकर टारगेट पूरा न होने से पल्ला नहीं झाड़ सकेंगे। निगम प्रबंधन ने मौजूदा सभी रूटों का आंकलन कर नये टारगेट फिक्स कर दिये हैं। किस रूट पर कितनी बसें चलती हैं, किस डिपो में कितने रूट घाटे के हैं, इन पर जो बसें चलती हैं, इसकी प्रति किलोमीटर औसत कितनी है, इसका पता लगाया गया है। निगम प्रबंधन ने यह रिकार्ड भी निकाला है कि कौन सा परिचालक रूट पर कितनी दैनिक इन्कम देता है, और चालक की कितनी डीजल खपत बस से आती है।
यदि किसी अन्य चालक परिचालक को इस रूट पर भेजा जाता है तो क्या इस आय में कमी या बढ़ोतरी हुई है। इस आंकलन के आधार पर ही टारगेट फिक्स किए गए हैं। रूट वाइज डीजल खपत व कंडक्टर वाइज इनकम कितनी आई है, इसका रिकार्ड मेंटेन किया जा रहा है।