नयी दिल्ली - हरियाणा में जेबीटी शिक्षकों की भर्ती में अनियमितता को लेकर 10 साल की सजा पाने वाले प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को आज सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिल सकी क्योंकि जस्टिस यूयू ललित ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। इस मामले की सुनवाई जस्टिस एके सीकरी की अध्यक्षता वाली अवकाश पीठ ने करनी थी।
पीठ इस मामले में चौटाला की याचिका पर विचार नहीं कर सकी, क्योंकि इस पीठ के अन्य सदस्य जस्टिस ललित ने यह कहते हुए इस मामले से खुद को अलग कर लिया कि वे जज पद पर पदोन्नत होने से पहले इस मामले में वकील के तौर पर पैरवी कर चुके हैं। इसके बाद जस्टिस सीकरी ने चौटाला के वकील को सलाह दी कि वे या तो चीफ जस्टिस एचएल दत्तू की पीठ के पास जायें या अवकाश पीठ में नयी नियुक्ति तक अगले सप्ताह तक इंतजार करें।
चौटाला को 4 अप्रैल को तिहाड़ जेल से एक माह के लिये रिहा कर दिया गया था। ऐसा इसलिए किया था ताकि वह हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर सकें। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में ट्रायल कोर्ट द्वारा चौटाला को दी गयी 10 साल की सजा को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट ने चौटाला के बेटे अजय चौटाला की 10 साल की सजा भी बरकरार रखी थी।