शिमला 15 फरवरी वन एवं मत्स्य पालन मंत्री श्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने आज यहां कहा कि प्रदेश में जलाश्यों के मछली एकत्रिकरण केन्द्रों के आधुनिकीकरण एवं निर्माण के लिए 1.89 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह राशि राष्ट्रीय मात्स्यकि विकास बोर्ड, हैदराबाद ने राज्य को शत प्रतिशत अनुदान के रूप में दी है।
वन एवं मत्स्य मंत्री ने कहा कि मत्स्य विभाग जलाश्यों से उत्पादित होने वाली मछली की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए विशेष प्रयास कर रहा है ताकि प्रदेश के जलाश्यों में कार्यरत मछुआरों को मछली के अधिक दाम मिल सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने कोल्ड चेन योजना भी तैयार की है, जिसके अंतर्गत प्रदेश के मछुआरों द्वारा पकड़ी गई मछली को एकत्रिकरण केन्द्रों तक पहुंचाने के लिए ‘कोल्ड चेन’ की सुविधा प्रदान की जाएगी। यह योजना केंद्र सरकार को स्वीकृति के लिए भेजी गई है। इस योजना के कार्यान्वयन से मछली पालकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी।
श्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने कहा कि प्रदेश में रेनबो ट्राउट मछली पालन की तकनीक को सफलतापूर्वक ट्राउट पालकों तक पहुंचाया गया है। अब तक प्रदेश में 160 ट्राउट मत्स्य पालकों के माध्यम से 370 ट्राउट यूनिट स्थापित की गए हैं, जिसके लिए मत्स्य पालन विभाग द्वारा आर्थिक एवं तकनीकी सहायता प्रदान की गई है। इस वित्त वर्ष में 100 अतिरिक्त ट्राउट यूनिट स्थापित करने के लिए धनराशि उपलब्ध करवाई गई है।
उन्होंने कहा कि ट्राउट फार्म, पतलीकूहल ट्राउट मछली बीज के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस वर्ष इस फार्म से 2 लाख रेनबो ट्राउट प्रजाति का मत्स्य बीज सिक्किम राज्य के लिए तथा 30 हजार मछली बीज भूटान के लिए निर्यात किया गया, जो एक रिकॉर्ड है।
वन मंत्री ने केन्द्र सरकार का मछली एकत्रिकरण केन्द्रों के आधुनिकीकरण एवं निर्माण के लिए 1.89 करोड़ रुपये स्वीकृत करने पर आभार व्यक्त किया है। उन्होंने अधिकारियों को इस कार्यक्रम को प्रदेश भर में आरम्भ करने तथा जनजातीय क्षेत्रों में मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें।