चण्डीगढ़,15 फरवरी- सूरजकुण्ड, फरीदाबाद में पहली फरवरी से शुरू हुए 27वें अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेले का आज समापन हो गया। हरियाणा के राज्यपाल श्री जगन्नाथ पहाडि़या ने मेले के समापन की घोषणा करते हुए कहा कि हमारे शिल्पकारों और कलाकारों ने हस्तशिल्प, गीत-संगीत और लोक कलाओं के माध्यम से देश की बहुमूल्य सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखने का सराहनीय कार्य किया है। श्री पहाडि़या ने युवा पीढ़ी का आह्वान किया कि वह इस विरासत को अपनी मेहनत से सुरक्षित रखे और इसे आगे बढ़ाये, ताकि देश की आजादी और राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिले।
श्री पहाडि़या ने कहा कि विश्व की सभी प्राचीन सभ्यताओं का इतिहास वास्तव में हस्तशिल्प और हथकरघा के इतिहास के साथ जुड़ा है। एक प्रकार से शिल्पियों को विश्व स यता का शिल्पी भी कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि मेले में प्रदर्शित हस्तशिल्प और हथकरघा की कलाकृतियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम हमारी समृद्घ संस्कृति और पर परा के प्रतीक हैं। विभिन्न देशों और प्रदेशों की भागीदारी से इस मेले में लघु विश्व की तस्वीर और विश्व मानव संस्कृति की झलक देखने को मिली।
थीम राज्य कर्नाटक की चर्चा करते हुए श्री पहाडि़या ने कहा कि कर्नाटक के हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पाद विश्वभर में वि यात हैं। कर्नाटक का॒अपना घर॒दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा, जहां कर्नाटक के रहन-सहन की सजीव झांकी देखने को मिली।
श्री पहाडि़या ने कहा कि यह गर्व की बात है कि सूरजकुण्ड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला कला और शिल्प को बढ़ावा देने के साथ-साथ कला के पारखियों के लिए भी बहुत अच्छा मंच प्रदान करता है। यहां निर्यातकों और खरीददारों को बिना बिचौलियों के एक-दूसरे से मिलने का अवसर मिलता है। कलाकारों को एक दूसरे के अनुभव से सीखने और अपनी कला को निखारने की प्रेरणा मिलती है।
श्री पहाडि़या ने मेले के आयोजकों को मेले के सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि आने वाले वर्षों में सूरजकुण्ड शिल्प मेला और अधिक विविधता के साथ पर परागत शिल्प उत्पादों और कलाओं को प्रस्तुत करेगा। उन्होंने पुरस्कार प्राप्त करने वाले शिल्पियों को भी बधाई दी।
इस अवसर पर श्री पहाडि़या ने मेले के श्रेष्ठ शिल्पकारों को कलामणि, कलानिधि और कलाश्री पुरस्कारों से भी स मानित किया। कलामणि पुरस्कारों में विजेताओं को 11-11 हजार रुपए और प्रमाण पत्र दिए गए। राजस्थान के द्वारका प्रसाद व मोहन लाल तथा कर्नाटक के ईश्वर नायक को कलामणि पुरस्कार से स मानित किया गया। कलानिधि पुरस्कार में विजेताओं को 5100-5100 रुपए और प्रमाण पत्र दिए गए। इनमें आंध्र प्रदेश के शिंदे श्री रामलू, छत्तीसगढ़ के जगतराम देवांगन और धनीराम झोरका, राजस्थान के सूरज शर्मा, पश्चिम बंगाल के सुभाष रविदास और उत्तर प्रदेश के मोह मद यूनुस शामिल है। कलाश्री पुरस्कारों में पांच कलाकारों को 2100-2100 रुपए और प्रमाण पत्र दिए गए। इनमें चंडीगढ से श्रीमती सोनिया बजाज, गुजरात से पंकज डी मकवाना, उत्तर प्रदेश से ओमप्रकाश बिंद और कन्हैया लाल प्रजापति तथा कर्नाटक से के. केंचैया शामिल है।
कर्नाटक के पर्यटन मंत्री श्री आनंद सिंह ने कहा कि कर्नाटक के लिए इस मेले में भाग लेना एक लंबी यात्रा की शुरूआत है। उन्होंने कहा कि इस मेले में कर्नाटक के शिल्प उत्पादों की अच्छी खरीददारी हुई और लाखों दर्शकों ने फेसबुक के माध्यम से कर्नाटक के बारे में और ज्यादा जानकारी हासिल की। श्री सिंह ने मेला प्राधिकरण के अधिकारियों और विशेष रूप से हरियाणा पर्यटन विभाग के अधिकारियों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि मेले के दौरान चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया और इस प्रतियोगिता के पहले तीन विजेताओं को कर्नाटक के लिए टृर पैकेज दिया गया है।
हरियाणा के पर्यटन विभाग के मुख्य संसदीय सचिव श्री राम किशन फौजी ने मेले के समापन के लिए राज्यपाल श्री पहाडि़या के आने के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस बार मेले में दर्शकों के लिए सुविधाएं बढ़ाई गईं, जिससे इस वर्ष और अधिक संख्या में दर्शक मेला देखने आए। थीम राज्य कर्नाटक की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि हरियाणा पर्यटन को उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए नए पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है।
कर्नाटक के पर्यटन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अरविंद जाधव ने कहा कि पिछले 15 दिनों में यहां हमारा जो रिश्ता बना है, हम उसे और बढ़ाना चाहेंगे। यहां आने वाले दर्शक कर्नाटक को और ज्यादा देखने को आतुर हैं, हम अपने पर्यटन को और विकसित करेंगे। हमें इस बात पर गर्व है कि हमें इस मेले में 18 वर्षों के बाद एक बार और थीम राज्य के रूप में भाग लेने का मौका मिला। उन्होंने अपने प्रदेश कीकला, संस्कृति और पर्यटन और अन्य विभागों के अधिकारियों और विशेष रूप से पर्यटन निदेशक सुश्री एम. सत्यावती व सांसद पदम श्री बी. जयश्री के योगदान की सराहना की। उन्होंने बीजापुर के ग्रामीण कलाकारों की भी सराहना की, जिन्होंने मेले में अपनी चित्रकारी का प्रदर्शन किया।
हरियाणा पर्यटन के प्रधान सचिव श्री विजय वर्धन ने कहा कि इस वर्ष मेले में 9 अफ्रीकी देशों, तीन यूरेशियाई देशों और 6 सार्क देशों के अलावा थाईलेंड और पेरू ने भी अपने शिल्प उत्पादों और कलाकृतियों के साथ अपने देश की संस्कृति का भी प्रदर्शन किया, जिससे इस मेले को और समृद्घ बनाने में सहायता मिली।
हरियाणा पर्यटन निगम के प्रबंध निदेशक श्री आनंद मोहन शरण ने कहा कि इस बार मेले में 1200 से अधिक शिल्पकारों और 600 से अधिक कलाकारों ने भाग लिया। थीम राज्य कर्नाटक ने इस मेले में भागीदारी का जो स्तर कायम किया है,उसे अगले मेलों में भी कायम रखा जाएगा।
मेले के समापन समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए। असम के कलाकारों ने बीहू नृत्य से दर्शकों का मन मोहा। गिनी के कलाकारों ने अपने यहां का एक मनोहारी नृत्य प्रस्तुत किया, जिसमें मृदंक और बांसुरी वादन का समावेश था। कांगो के कलाकारों ने गांगुलीस नृत्य की प्रस्तुति की, लेकिन थीम राज्य कर्नाटक के कलाकारों ने अपने नृत्यों से एक ऐसा समां बांधा कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। कलाकारों ने कई भागों में अपने नृत्य प्रस्तुत किए और अंत में सभी कलाकारों ने सामूहिक नृत्य की प्रस्तुति की।
इस अवसर पर राज्यपाल श्री पहाडि़या की धर्मपत्नी श्रीमती शांति पहाडि़या भी मौजूद थी। अन्य विशिष्ट अतिथियों में हरियाणा के मंत्री पंडित शिव चरण लाल शर्मा, कर्नाटक की पर्यटन प्रबंध निदेशक एम. सत्यावती,फरीदाबाद प्रशासन के अधिकारी और पुलिस अधिकारी व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।