शिमला - मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने प्रदेश में सहकारी आंदोलन को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह लोगों को विभिन्न प्रकार की आवश्यक सेवाएं उपलब्ध करवाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि सहकारी सभाओं की गतिविधियों के विविधिकरण तथा विस्तारीकरण के लिए अनेक पग उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री गुरुवार को आयोजित सहकारी परिषद की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। वीरभद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 4800 सहकारी सभाएं कार्यरत हैं, जिनके16 लाख से अधिक सदस्य हैं और 22 हजार करोड़ रुपए की कार्य पूंजी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की शत-प्रतिशत जनसंख्या सहकारिता के अधीन लाई गई है और सहकारी सभाएं कृषि उत्पादों का विपणन, खाद, कृषि उपकरण व अन्य आवश्यक वस्तुएं प्रदेश के लोगों को उपलब्ध करवाने में सहायक सिद्ध हो रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेक सहकारी सभाएं उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं, हालांकि किसी तरह की गड़बड़ी में संलिप्त सहकारी सभाओं पर निगरानी रखने और सख्ती से पेश आने की आवश्यकता है। वीरभद्र सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत परचून विके्रताओं को मिलने वाले कमीशन को संशोधित करने पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा सहकारी सभाओं को काश्तकारी एवं भू-सुधार अधिनियम की धारा-18 के प्रावधान में छूट देने और राज्य से बाहर के लोगों को सहकारी सभाओं में प्रवेश नहीं देने के बारे में विचार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सातवीं से दसवीं कक्षा के सामाजिक अध्ययन के पाठ्यक्रम में सहकारी आंदोलन को शामिल करने हेतु इसकी समीक्षा करेगी। वीरभद्र सिंह ने बैठक में सहकारी विभाग में निरीक्षकों के रिक्त 120 और लिपिकों के 60 पद भरने की स्वीकृति प्रदान की। उन्होंने कहा कि कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के लिए 252 पद स्वीकृत किए गए हैं और शेष रिक्त पदों को भी शीघ्र ही भरा जाएगा।