शिमला - सडक़ परिवहन एवं सुरक्षा विधेयक के विरोध में एचआरटीसी कर्मचारियों की हड़ताल से हिमाचल में आम जन थमा दिखा। बसें न चलने से यात्री सडक़ों पर ही दिक्कतें झेलते दिखे। हड़ताल से सबसे ज्यादा मुसीबतें कालेज व स्कूली छात्रों को झेलनी पड़ीं। समय पर बसें न मिलने से छात्र स्कूल कालेज नहीं पहुंच पाए। वहीं कर्मचारी वर्ग भी हड़ताल से खासा प्रभावित हुआ। कर्मचारी देरी से कार्यालय पहुंचे, जबकि शाम के समय ही कर्मचारियों को घर तक पहुंचने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। एचआरटीसी कर्मचारी की एकदिवसीय हड़ताल से परिवहन निगम को एक दिन में एक करोड़ 85 लाख की चपत लगी।
इसके अलावा जन मानस को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ी हैं। हड़ताल का अंतरराज्यीय व प्रादेशिक रूटों पर व्यापक असर दिखा। व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई रही। हालांकि प्रादेशिक रूटों पर निजी बस आपरेटरों ने सेवाएं दीं, लेकिन उक्त सेवाएं ऊंट के मुंह में जीरे के समान दिखीं। हड़ताल के चलते हर ओर व्यवस्था थमी दिखी। एचआरटीसी कर्मचारियों ने उक्त विधेयक के खिलाफ जिला स्तर पर प्रदर्शन भी किए। समिति के सचिव खेमेंद्र गुप्ता ने कहा कि उक्त विधेयक के खिलाफ आगामी कार्रवाई ऑल इंडिया रोड ट्रांसपोर्ट वर्कर फेडरेशन के दिशा निर्देशों पर ही अमल में लाई जाएगी।
आज सभी बसें रूटों पर चलेंगी और जनता को परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।शादियों में खूब दौड़ीं सरकारी बसेंहड़ताल के चलते प्रदेश भर में एचआरटीसी की बसें रूट पर नहीं चलीं, लेकिन शादियों में बुक एचआरटीसी की बसें अवश्य चलीं। इनकी संख्या 33 के करीब बताई जा रही है। एचआरटीसी की भावानगर-धर्मशाला रूट पर चलने वाली बस में सफर करने वाले यात्रियों का आरोप है कि उनकी टिकटें धर्मशाला तक की काटी गई थीं, लेकिन सुबह चार बजे बस हमीरपुर में खड़ी कर दी गई और उनसे उतरने के लिए कहा गया। इनका आरोप है कि जब बस धर्मशाला नहीं जानी थी तो टिकट धर्मशाला के क्यों काटे गए