शिमला - मांगें मनवाने के लिए अड़े परिवहन निगम के कर्मचारी गुरुवार को प्रस्तावित हड़ताल को किसी भी सूरत में रद्द करने के लिए तैयार नहीं हैं। हिमाचल परिवहन कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) ने प्रारूप सडक़ परिवहन एवं सुरक्षा विधेयक-2015 के विरोध में 30 अप्रैल को हड़ताल करने का फैसला लिया है।
शिमला में मंगलवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में समिति सचिव खेमेंद्र गुप्ता ने कहा कि कर्मचारी 30 अप्रैल को प्रस्तावित हड़ताल के फैसले पर अडिग हैं। केंद्र सरकार सार्वजनिक परिवहन का बाजारीकरण कर इसे बड़े उद्योगपतियों को बेचने जा रही है। परिवहन सेवा जीवन की सबसे महत्त्वपूर्ण जरूरतों में से एक है, लेकिन इसे संपूर्ण रूप से निजी हाथों में बेचने की तैयारी हो रही है। इनमें कार्यरत लाखों श्रमिकों का भविष्य अंधकार की ओर बढ़ेगा। सब ओर निजी बड़े उद्योगपतियों का बोलबाला होगा। इसमें देश की आम जनता को सस्ती व व्यवस्थित परिवहन व्यवस्था उपलब्ध नहीं होगी।
उद्योगपतियों को बड़ी-बड़ी परिवहन कंपनियां खोलने का रास्ता खुल जाएगा। नए प्रारूप में तीन एवं चार पहिया वाहनों के रखरखाव मरम्मत का कार्य उनकी निर्माता कंपनियों के सर्विस सेंटर पर ही करवाना होगा, स्टेज कैरिज व कांट्रैक्ट कैरिज की केटागरी में फर्क खत्म कर दिया गया है। वाहन चालकों को सजा देने के ऐसे प्रावधान रखे गए हैं जैसे वे अपराधी हों। दुर्घटना में बच्चे की मौत पर तीन लाख रुपए जुर्माना एवं सात वर्ष जेल, दुर्घटना में बच्चे के अलावा किसी अन्य की मौत पर एक लाख रुपए जुर्माना एवं चार वर्ष जेल के प्रावधान पर भी समिति ने असंतोष जताया है।