कैथल- पाई अनाज मंडी, करोडा, सेरधा आदि अनाज मंडियों के आढ़तियों ने सरकार के नए नियमों के तहत किसानों की गेहूं की फसल खरीद एजेंसियों को देने से इंकार कर दिया है। आढ़ती दिलबाग, रामकुमार, सतनारण, करोडा मंडी प्रधान शिव कुमार, संजय तथा सेरधा मंडी के प्रधान रिषीपाल गुप्ता ने बताया कि सरकार के द्वारा जो नियम बनाए गए है। वे बिलकुल गलत है। इन नियमों के तहत वे सरकार की खरीद एजेंसियों को किसानों की गेहूं नहीं बेचेंगे।
उन्होंने बताया कि इन नियमों से उनके व किसानों के बीच झगड़ा होगा। बोली के समय किसानों की फसल के दाम 1450 रुपए लिखा जाएगा। बाद में जब लदान होकर रह सरकारी गोदामों में लगेगा तो उस समय गेहूं में नमी, डिस्कलर व चमक की पहचान की जाएगी। सरकार के द्वारा किसानों को जो डेम्रेज छह प्रतिशत से बढ़ा कर नौ प्रतिशत की है, उसके पैसे भी बाद में आढ़तियों को अदायगी करते समय कट लगाया जाएगा। कुल मिला कर लगभग 50 रुपए से भी ज्यादा का कट लगेगा , जिसको आढ़ति अपने पास से नहीं देंगं। सारी स्थिति साफ होने के बाद ही गेहूं सरकार को दी जाएगी। उधर किसान यूनियन के राष्ट्र सलाह कार अजीत हाबड़ी ने भी सरकार से स्थिति साफ करने व बिना कट के खरीदने की मांग की है।