शिमला - हाइड्रो पावर की 27 हजार मेगावाट की क्षमता चिन्हित करने के बाद प्रदेश में सौर ऊर्जा की भी 33 हजार 840 मेगावाट की क्षमता आंकी गई है। इस ऊर्जा का दोहन होता है तो हिमाचल असल में ऊर्जा राज्य साबित हो जाएगा, जिसका कोई मुकाबला कहीं भी नहीं कर पाएगा। सौर ऊर्जा की क्षमता को चिन्हित कर लिया गया है, जिसके लिए पिछले कुछ सालों से प्रयास चल रहे थे।
इसकी विस्तृत रिपोर्ट अभी सामने आनी शेष है, मगर सरकार को ऊर्जा एजेंसियों ने 33840 मेगावाट क्षमता का आकलन भेज दिया है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार यह सौर ऊर्जा क्षमता सामने आने के बाद सरकार ने अपनी सौर ऊर्जा नीति में भी कुछ बदलाव करने की सोची है। ऐसा इसलिए किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक लोग सौर ऊर्जा में निवेश के लिए आगे आएं। यहां बता दें कि जब से सौर ऊर्जा नीति बनाई गई है, तब से अभी तक किसी भी निजी कंपनी ने यहां पर प्रोजेक्ट के लिए आवेदन नहीं किया है।
फिलहाल प्रदेश में बिजली बोर्ड के पास लाहुल-स्पीति में एक प्रोजेक्ट है, वहीं पावर कार्पोरेशन के पास श्रीनयनादेवी में एक प्रोजेक्ट प्रस्तावित है। इसके अलावा सौर ऊर्जा का मुख्य रूप से दोहन हिम ऊर्जा कर रहा है, जिसने सरकारी इमारतों में सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित करने का बड़ा अभियान चलाया है। गांव में स्ट्रीट लाइटों की योजना चल रही है, जिसके तहत 36 हजार से अधिक स्ट्रीट लाइटें लगाई जा चुकी हैं, वहीं 63 हजार से अधिक लाइट्स का प्रस्ताव अभी केंद्र सरकार को भेजा गया है।
इस साल 200 मेगावाट उत्पादन का लक्ष्यइस साल प्रदेश में 200 मेगावाट सौर ऊर्जा के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। खुद हिमाचल प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने यह लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत बिजली बोर्ड को इस पर काम करना है। बोर्ड के साथ पावर कारपोरेशन भी इस पर काम करेगा। सोलर पालिसी में निवेश को बढ़ाने के दृष्टिगत नियामक आयोग ने ही सौर ऊर्जा नीति में कुछ बदलाव करने की हिदायत सरकार को दी थी, जिस पर खाका तैयार किया जा रहा है।